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राजस्थान में 1 अप्रैल से देसी-विदेशी शराब के दाम बढ़े, आम आदमी की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

राजस्थान में 1 अप्रैल से देसी-विदेशी शराब के दाम बढ़े, आम आदमी की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

Lifeberrys 1 month ago

राजस्थान में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही शराब की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम लोगों की जेब पर साफ नजर आने वाला है। 1 अप्रैल से प्रदेश में देसी और अंग्रेजी शराब के साथ-साथ बियर के दामों में 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि लागू कर दी गई है।

आबकारी विभाग ने एक्साइज ड्यूटी और एक्स-डिस्टिलरी प्राइस (EDP) में इजाफा किया है, जिसके चलते उपभोक्ताओं को अब पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि विभाग की ओर से विस्तृत नई रेट लिस्ट अभी जारी नहीं की गई है।

इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक प्रभाव देसी शराब पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि इसकी कीमतों में करीब 8 से 9 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के तौर पर, 900 रुपये तक मिलने वाली देसी शराब की बोतल पर अब 80 से 85 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। वहीं, राज्य में तैयार होने वाली शराब की कीमतों में भी लगभग 8 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिल सकता है। इसके मुकाबले विदेशी ब्रांड्स या अंग्रेजी शराब पर असर अपेक्षाकृत कम रहेगा, जहां कीमतों में करीब 2.5 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

बियर के शौकीनों को भी इस बदलाव का असर झेलना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार, एक हजार रुपये तक की बियर पर करीब 25 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है, जबकि कैन पैक पर यह बढ़ोतरी लगभग 30 से 35 रुपये तक पहुंच सकती है। आबकारी विभाग का कहना है कि कीमतों में यह वृद्धि केवल टैक्स बढ़ने के कारण नहीं है, बल्कि उत्पादन लागत में हुई बढ़ोतरी यानी EDP के कारण भी दाम ऊपर गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले डेढ़ साल में एक्साइज ड्यूटी के जरिए राज्य की आय में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे सरकारी खजाने में लगभग 3500 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। विभाग का अनुमान है कि वर्ष 2026 में इस नई मूल्य वृद्धि के चलते करीब 1500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है।

इसके अलावा, इस वर्ष आबकारी विभाग ने 98 प्रतिशत शराब की दुकानों की सफल नीलामी भी पूरी कर ली है, जो तय समय के भीतर संपन्न हुई। फिलहाल पूरे प्रदेश में करीब 7665 लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं। ऐसे में साफ है कि नए वित्तीय वर्ष के साथ यह बदलाव सरकार के राजस्व को बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर भी आर्थिक दबाव बढ़ाएगा।

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