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यूसुफ पठान समेत तीन मुस्लिम सांसदों ने बनाई NDA से दूरी, भाजपा में शामिल होने की अटकलों को भी किया खारिज

यूसुफ पठान समेत तीन मुस्लिम सांसदों ने बनाई NDA से दूरी, भाजपा में शामिल होने की अटकलों को भी किया खारिज

Lifeberrys 2 months ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के विभिन्न सहयोगी दलों के सांसदों की मंगलवार को संसद परिसर में आयोजित साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक हुई।

इस बैठक में सत्तारूढ़ गठबंधन के लगभग सभी प्रमुख नेता मौजूद रहे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बने एनसीपीआई (NCPI) के 20 सांसदों में से तीन मुस्लिम सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। उनकी अनुपस्थिति को लेकर गठबंधन के भीतर मतभेद और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।

पश्चिम बंगाल के जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान, मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहेर खान और बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान लगातार दूसरी बार एनडीए संसदीय दल की बैठक से दूर रहे। इससे पहले 21 जुलाई को आयोजित पहली 'मंगल मिलन' बैठक में भी इन तीनों नेताओं ने हिस्सा नहीं लिया था। लगातार दो बैठकों से दूरी बनाए रखने के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।

भाजपा और NDA से दूरी की वजह खुद बताई


बैठक से दूर रहने के फैसले पर अबू ताहेर खान ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि उनका एनडीए से कोई राजनीतिक संबंध नहीं है और न ही वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को आयोजित एनडीए की बैठक में भी वे नहीं गए और भविष्य में भी ऐसी बैठकों में शामिल होने का उनका कोई कार्यक्रम नहीं है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से उनके संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर कोई बैठक बुलाई जाती है, तो उसमें वे जरूर शामिल होंगे। खान ने कहा कि क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर हैं। साथ ही उन्होंने दोहराया कि मुस्लिम समुदाय के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई या फैसले का वे समर्थन नहीं करेंगे।

इसी दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मंगलवार को संसद भवन पहुंचे, जिससे राजनीतिक चर्चाओं का दौर और तेज हो गया।

मतदाताओं की नाराजगी बनी दूरी की वजह!

सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों सांसदों के एनडीए बैठक से दूर रहने के पीछे एक अहम राजनीतिक कारण भी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि मुस्लिम बहुल लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के एक वर्ग की ओर से भाजपा के साथ बढ़ती कथित निकटता को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्होंने राजनीतिक संदेश देने के लिए एनडीए की बैठकों से दूरी बनाए रखने का फैसला किया।

माना जा रहा है कि यह कदम अपने पारंपरिक वोट बैंक के बीच किसी तरह का भ्रम पैदा होने से रोकने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

लोकसभा में NCPI की मान्यता अब भी लंबित

इन तीन सांसदों की गैरहाजिरी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लोकसभा में एनसीपीआई के 20 सदस्यीय समूह को आधिकारिक मान्यता मिलने का मामला अभी तक लंबित है। इस संबंध में अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना है।

दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी भी अलग हुए समूह को तभी कानूनी संरक्षण मिल सकता है, जब उसके साथ मूल दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद हों। एनसीपीआई के मामले में भी यही नियम लागू होता है। तृणमूल कांग्रेस के मूल 28 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई समर्थन मिलने पर ही इस समूह को कानूनी मान्यता का लाभ मिल सकेगा।

सुदीप बंद्योपाध्याय पहली बार पहुंचे NDA की बैठक में

दूसरी ओर, एनसीपीआई के लोकसभा नेता सुदीप बंद्योपाध्याय मंगलवार को पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि एनसीपीआई पूरी तरह एकजुट है और पार्टी के भीतर किसी तरह का मतभेद नहीं है।

उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल होना उनके लिए एक अच्छा अनुभव रहा। साथ ही उन्होंने तीन सांसदों की अनुपस्थिति को लेकर उठ रही अटकलों को भी खारिज करते हुए कहा कि संगठन के भीतर किसी प्रकार का विभाजन नहीं है।

बैठक में पीएम मोदी के साथ दिखे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन

संसद भवन परिसर में आयोजित इस बैठक की एक और तस्वीर चर्चा में रही, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगल में बैठे नजर आए। यह बैठक ऐसे समय आयोजित हुई, जब एक दिन पहले बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार को चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

बांकीपुर सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया गया क्योंकि नितिन नवीन ने भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

बैठक में रोजगार और खेल नीति पर हुई विस्तृत चर्चा

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मोदी सरकार की खेल नीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में लागू की गई नई खेल नीति के बाद भारत ने ओलंपिक, एशियन गेम्स और राष्ट्रमंडल खेलों जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पहले की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है और कई स्वर्ण पदक भी हासिल किए हैं।

बैठक में रोजगार के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्तुति के दौरान दावा किया गया कि पिछले कुछ वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में लगातार वृद्धि हुई है। मनोज तिवारी ने बताया कि बैठक में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2004 से 2014 के बीच संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के कार्यकाल में लगभग 2.89 करोड़ युवाओं को रोजगार मिला था, जबकि 2014 से 2026 के बीच मोदी सरकार के दौरान करीब 17.1 करोड़ युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया।

इसके अलावा सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और उनके प्रभाव पर भी सांसदों के सामने विस्तृत प्रस्तुति दी गई।

कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद

भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.पी. चौधरी ने बैठक को लेकर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मंगल मिलन में हमेशा मंगल ही होता है।"

बैठक में भाजपा के अलावा जदयू, जद(एस), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), शिवसेना और एनसीपीआई के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और एनडीए के प्रमुख नेता भी इस साप्ताहिक बैठक में मौजूद रहे।

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