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चारधाम यात्रा: मानसून की तैयारी अधूरी, जोखिम भरी आवाजही

चारधाम यात्रा: मानसून की तैयारी अधूरी, जोखिम भरी आवाजही

मानसून सीजन शुरू होते ही पहाड़ की सड़कों ने वाहन चालकों सहित स्थानीय लोगों और चारधाम यात्रियों की परीक्षा लेना शुरू कर दिया है। बीती रविवार देर रात्रि हुई बारिश के कारण नेताला के समीप मलबा आने के कारण सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई।

इस कारण वहां पर छोटे चोपहिया और दोपहिया फंसने के कारण करीब एक घंटे वाहन फंसे रहे।

किसी प्रकार वाहनों को निकालकर आवाजाही शुरू करवाई गई। वहीं, अभी भी वहां पर आवाजाही जोखिमभरी बनी हुई है। दूसरी ओर सोमवार सुबह डबरानी के समीप मलबा बोल्डर आने के कारण आवाजाही आधे घंटे बंद रही। मानसून सीजन को लेकर शासन प्रशासन की ओर से भूस्खलन जोन पर मशीनरी और पुलिस सहित होमगार्ड जवान तैनात करने के दावे किए गए थे।

लेकिन धरातल पर मानसून की तैयारियां अभी भी आधी अधूरी है। नेताला के समीप एक भी मशीन व सुरक्षा व्यवस्था नहीं देखने को मिली। दूसरी ओर यमुनोत्री हाईवे पर भी पिछले कुछ दिनों से हाईवे बंद और खुलने का सिलसिला जारी है।

राज्य में भूस्खलन से 38 सड़कें बंद

राज्य में रविवार को भी यातायात प्रभावित रहा। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से जारी बुलेटिन के अनुसार प्रदेश में भूस्खलन के चलते 38 मार्ग बंद हैं, जिनमें स्टेट हाईवे से लेकर मुख्य जिला मार्ग और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। सबसे अधिक प्रभावित पिथौरागढ़ जिका है। यहां पर13 सड़कें बंद हैं।

देहरादून जिले में सात और चमोली में छह मार्ग बंद हैं। बागेश्वर और टिहरी जिले में पांच-पांच सड़कें बंद हैं। रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा जिले में एक एक मार्ग बंद है। सड़क खोलने को लेकर लोक निर्माण विभाग की टीम प्रयास कर रही है।

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