Dailyhunt
दिल्ली-एनसीआर में घरेलू उपयोग के लिए हो रहा भूजल का अत्यधिक दोहन

दिल्ली-एनसीआर में घरेलू उपयोग के लिए हो रहा भूजल का अत्यधिक दोहन

रकार ने गुरुवार को लोकसभा को बताया कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के जिलों में घरेलू उपयोग के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है।

जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने प्रश्न का उत्तर में कहा कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) के पास उपलब्ध डाटा के अनुसार, दिल्ली में कुल भूजल दोहन का 71.88 प्रतिशत घरेलू उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

घरेलू उपयोग के लिए भूजल के कुल दोहन में ऊंची इमारतों में बने अपार्टमेंट भी शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर सीजीडब्ल्यूए भूजल दोहन का नियमन करता है, जबकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अपने-अपने नियामक तंत्र हैं। सीजीडब्ल्यूए विभिन्न उद्देश्यों के लिए 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भूजल दोहन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करता है।

दिशानिर्देशों के अनुसार उद्योगों और हाउसिंग अपार्टमेंट/ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों सहित विभिन्न परियोजनाओं पर निर्धारित स्लैब के अनुसार भूजल दोहन शुल्क लगाया जाता है।

प्राधिकरण भूजल के अवैध दोहन के लिए भारी जुर्माना और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाने सहित कड़े उपाय कर रहा है, और उचित मामलों में बोरवेल को सील भी कर रहा है।

सीजीडब्ल्यूए के दिशानिर्देशों में प्रविधान है कि आवासीय अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के लिए एनओसी केवल उन मामलों में दी जाएगी जहां स्थानीय सरकारी जल आपूर्ति एजेंसी क्षेत्र में आवश्यक मात्रा में पानी की आपूर्ति करने में असमर्थ है। भूजल निकालने वाले सभी कुओं में डिजिटल वाटर फ्लो मीटर लगाना सभी आवासीय अपार्टमेंटों और समूह आवास समितियों के लिए अनिवार्य है।

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए माडल बिल्डिंग बायलाज (एमबीबीएल) तैयार किए हैं, जिसमें वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण उपायों पर जोर दिया गया है।

एमबीबीएल के अनुसार, 100 वर्ग मीटर या उससे अधिक के भूखंड आकार वाले सभी भवनों में वर्षा जल संचयन के प्रस्ताव अनिवार्य रूप से शामिल होने चाहिए और दिल्ली जल बोर्ड द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दिल्ली में इसका पालन किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि देशभर में निगरानी किए गए कुओं में से 73.25 प्रतिशत में 2025 की मानसून के बाद की अवधि में भूजल स्तर में 2015-2024 के बीच के दशकीय औसत की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है।

सीजीडब्ल्यूबी द्वारा 2022 से किए जा रहे भूजल संसाधनों के वार्षिक आकलन से पता चलता है कि कुल भूजल पुनर्भरण 2017 में 432 अरब घन मीटर (बीसीएम) से बढ़कर 2025 में 448.52 बीसीएम हो गया है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Live Halchal