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पहाड़ों में बारिश से भाखड़ा डैम में बढ़ा जलस्तर: खरीफ फसलों की सिंचाई को मिलेगी रफ्तार

पहाड़ों में बारिश से भाखड़ा डैम में बढ़ा जलस्तर: खरीफ फसलों की सिंचाई को मिलेगी रफ्तार

रियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के कारण यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव आया है। यदि अगले दो-तीन दिनों तक नियमित वर्षा होती है तो जलस्तर में और बढ़ोतरी होगी।

उन्होंने कहा कि फिलहाल सिंचाई के लिए पानी की कोई कमी नहीं है।

हरियाणा में खरीफ फसलों की रोपाई और बुवाई का कार्य जारी है। हालांकि इस वर्ष अब तक सामान्य से कम बारिश होने के कारण नहरों में पानी की उपलब्धता प्रभावित रही है। पिछले दो दिनों में हुई बारिश से स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। इसी बीच भाखड़ा डैम का जलस्तर पिछले 24 घंटे में 1.46 फीट बढ़ा है, जबकि हथिनीकुंड बैराज पर यमुना का प्रवाह मंगलवार की तुलना में घट गया।

भाखड़ा डैम में वर्षभर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जलस्तर 1680 फीट के आसपास होना आवश्यक माना जाता है। बुधवार को डैम का जलस्तर 1597.20 फीट दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार को यह 1595.74 फीट था। इस तरह 24 घंटे में जलस्तर में 1.46 फीट की बढ़ोतरी हुई। फिलहाल हरियाणा को सिंचाई के लिए करीब 8,208 क्यूसेक पानी मिल रहा है।

वहीं, हथिनीकुंड बैराज पर मंगलवार सुबह से बुधवार तक यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मंगलवार सुबह छह बजे बैराज पर 18,969 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था जो शाम तक बढ़कर करीब 30 हजार क्यूसेक पहुंच गया। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण यह बढ़ोतरी हुई। हालांकि बुधवार दोपहर तीन बजे तक प्रवाह घटकर करीब 23 हजार क्यूसेक रह गया। बरसात के मौसम में यहां सामान्यतः 40 से 50 हजार क्यूसेक पानी का प्रवाह रहता है।

हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के कारण यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव आया है। यदि अगले दो-तीन दिनों तक नियमित वर्षा होती है तो जलस्तर में और बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल सिंचाई के लिए पानी की कोई कमी नहीं है।

20 सितंबर तक सिंचाई के लिए पानी रहेगा जरूरी
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने बताया कि खरीफ फसलों की रोपाई और बुवाई का कार्य 31 जुलाई तक प्रमुख रूप से पूरा होगा, जबकि कई किसान 10 अगस्त तक यह कार्य जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि धान की फसल के लिए 20 सितंबर तक नियमित सिंचाई की आवश्यकता रहेगी। ऐसे में नहरों के माध्यम से पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना जरूरी होगा।

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