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पाकिस्तान में जैश के एक और टॉप कमांडर की मौत

पाकिस्तान में जैश के एक और टॉप कमांडर की मौत

पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में बुधवार को पाकिस्तान के बहावलपुर में एक अज्ञात वाहन की टक्कर से जैश के शीर्ष कमांडर मौलाना सलमान की मौत हो गई।

वह जैश सरगना मसूद अजहर का करीबी था और भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल था। इनमें 2001 का संसद हमला और 2019 का पुलवामा हमला शामिल है। वह ऐसे लोगों में से एक था जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश के बहावलपुर मुख्यालय पर हुई बमबारी में घायल हुआ था।

मौलाना सलमान को बुधवार शाम को ही बहावलपुर के मरकज सुभानअल्लाह में दफना दिया गया। उसके जनाजे में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के कुछ अधिकारी भी शामिल हुए, जो आतंकी संगठन को पाकिस्तान के सरकारी प्रतिष्ठान के समर्थन को दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए कई आतंकियों के अंतिम संस्कार में भी पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के कई अधिकारी शामिल हुए थे। भारतीय सेना के इस आपरेशन में जैश के कई बड़े कमांडर और मसूद अजहर के परिवार के सदस्य मारे गए थे।

मौलाना सलमान से पहले भी जैश और लश्कर के शीर्ष कमांडर या आतंकी रहस्यमयी परिस्थितियों में मारे गए हैं। सलमान की मौत से ठीक दो दिन पहले लश्कर के शीर्ष आतंकी शेख यूसुफ अफरीदी की खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी थी। पिछले वर्ष जैश के मुख्य रणनीतिकार मौलाना अब्दुल अजीज अजर की भी रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिस पर से अभी तक पर्दा नहीं हटा है।

इसी वर्ष 16 अप्रैल को लश्कर के संस्थापक सदस्यों में से एक मौलाना आमिर हमजा पर अज्ञात बंदूकधारियों ने फायरिंग की, जब वह अपनी गाड़ी के अंदर बैठा था। खबरों के मुताबिक वह इस हमले में बच गया है। पिछले वर्ष मार्च में लश्कर के एक शीर्ष आतंकी अबू नताल को भी पाकिस्तानी पंजाब के झेलम जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी थी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ये दोनों संगठन फिर से मजबूत होने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन रहस्यमय परिस्थितियों में इन मौतों से दोनों संगठनों को जबर्दस्त झटका लगा है।

खबर है कि जैश और लश्कर दोनों ही संगठनों में नेतृत्व का संकट गहरा गया है। पुष्ट खबर है कि मसूद अजहर की सेहत बहुत अधिक खराब है। आईएसआई के निर्देशन में जैश अब नया नेतृत्व खड़ा करने का प्रयास कर रहा है।

पाकिस्तानी मीडिया पर अजहर से जुड़ी कोई भी खबर दिखाने पर 'अघोषित प्रतिबंध' है। लश्कर की स्थिति भी ऐसी ही है। कई लोग उसके सरगना हाफिज सईद पर सवाल उठा रहे हैं और उसमें नए नेतृत्व की मांग जोर पकड़ रही है।

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