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पूजा में भगवान को क्यों चढ़ाया जाता है पंचमेवा?

पूजा में भगवान को क्यों चढ़ाया जाता है पंचमेवा?

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान भगवान को कई चीजें अर्पित की जाती हैं। इनमें फल, फूल से लेकर मिठाइयों के साथ-साथ पंचमेवा भी शामिल होता है। पंचमेवा को एक साधारण प्रसाद नहीं माना जाता, बल्कि हिंदू मान्यताओं में यह शुद्धता, संपन्नता और शुभता से गहराई से जुड़ा हुआ है।

क्या आपने कभी पूजा की थाली सजाते हुए सोचा है कि भगवान को हमेशा पंचमेवा ही क्यों चढ़ाया जाता है? आइए इसे बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं।

आखिर क्या होता है पंचमेवा?
सीधे शब्दों में कहें तो पंचमेवा 5 तरह के सात्विक सूखे मेवों का एक मिला-जुला रूप है। अलग-अलग हिस्सों में मेवों के चुनाव में थोड़ा बहुत बदलाव हो सकता है, लेकिन आमतौर पर इसमें बादाम, काजू, किशमिश, मखाना और छुआरा (या सूखा नारियल) शामिल किया जाता है। पूजा पूरी होने के बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

पूजा-विधान की पुस्तकों जैसे 'कर्मकांड भास्कर' और 'पुरोहित दर्पण में पंचमेवा समर्पित करने को लेकर यह श्लोक भी है:

द्राक्षा खर्जूर कदली पनसाम्रकपित्थकम्।
नारिकेलेक्षुजम्ब्वादि फलानि प्रतिगृह्यताम्॥

अर्थ- हे परमेश्वर! द्राक्षा (किशमिश), खर्जूर (छुआरा/खजूर), नारिकेले (नारियल), कदली (मखाना/केला) और फलों से युक्त यह पवित्र नैवेद्य (पंचमेवा) मैंने आपके लिए तैयार किया है, कृपया भक्तिपूर्वक अर्पित किए गए इस भोग को स्वीकार करें।

पंचमेवा चढ़ाने के पीछे की वजह
सूखे मेवों को सबसे सात्विक और पौष्टिक आहार माना गया है। क्योंकि, ये मेवे जल्दी खराब नहीं होते और लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं, इसलिए इन्हें भगवान को अर्पित करना जीवन में स्थिरता और सुख-शांति की कामना को दर्शाता है। पंचमेवा को प्रकृति के पांच तत्वों और जीवन के संतुलन का प्रतीक भी माना जाता है।

किन अवसरों पर होता है इस्तेमाल?
भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, शिव जी या गणेश जी की पूजा हो, पंचमेवे का भोग हर देवता को प्रिय है। जन्माष्टमी, नवरात्र, दीपावली, सत्यनारायण कथा और हवन जैसे शुभ मौकों पर पंचामृत के साथ इसे खास तौर पर बांटा जाता है। प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करना भगवान के प्रति हमारी श्रद्धा को दिखाता है।

5 मेवों का महत्व
बादाम: तेज बुद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और शारीरिक ऊर्जा का प्रतीक

काजू: घर में धन, समृद्धि और बरकत लाने वाला माना गया

किशमिश: जीवन और रिश्तों में मिठास, प्रेम और प्रसन्नता को बनाए रखने के लिए

मखाना: सबसे शुद्ध, पवित्र और सात्विक

छुआरा या सूखा नारियल: शुभ काम की पूर्णता (सफलतापूर्वक पूरा होने) का प्रतीक

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Live Halchal