Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story

संसद में पारित हुआ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026: 'वंदे मातरम' का अपमान अब होगा आपराधिक.

Live Today 1 week ago

संसद के मानसून सत्र के दौरान एक ऐतिहासिक विधायी कदम उठाते हुए लोकसभा ने 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' को अपनी मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के तहत भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का जानबूझकर अनादर, अपमान या अवहेलना करने को एक दंडनीय आपराधिक अपराध बना दिया गया है।

राज्यसभा से मंजूरी मिलने के ठीक एक दिन बाद इसे निचले सदन द्वारा भी पारित कर दिया गया। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद आधिकारिक गजट में अधिसूचित होते ही यह पूरे देश में कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

लोकसभा में इस विधेयक को भारी राजनीतिक हंगामे के बीच चर्चा के लिए लाया गया था। विपक्ष के सदस्यों ने नीट (NEET) पेपर लीक विवाद का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की कथित बर्बरता के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए सदन के वेल में लगातार नारेबाजी और हंगामा किया। हालांकि, इस भारी शोर-शराबे के बावजूद सरकार ने अपने तय विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया। केंद्रीय मंत्रियों ने तर्क दिया कि जिस प्रकार राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज को कानूनी संरक्षण प्राप्त है, उसी प्रकार राष्ट्रीय गीत को भी समान सुरक्षा मिलनी चाहिए, जिसके बाद विधेयक को ध्वनि मत से पास कर दिया गया।

यह नया संशोधन मूल रूप से 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' में बदलाव करता है। 1971 का मूल कानून मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, भारत के संविधान और राष्ट्रगान ('जन गण मन') के अपमान को रोकने पर केंद्रित था। पुराने ढांचे के तहत राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रगान का अपमान करने पर अधिकतम तीन साल की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान था, लेकिन 1950 में संविधान सभा द्वारा राष्ट्रीय गीत का दर्जा पाने वाले 'वंदे मातरम' के लिए ऐसा कोई सख्त आपराधिक प्रावधान नहीं था। 2026 का यह संशोधन इस अंतर को समाप्त करते हुए 'वंदे मातरम' का सार्वजनिक अपमान करने पर भी राष्ट्रगान और ध्वज के समान ही तीन साल तक की जेल और जुर्माने की कानूनी जवाबदेही तय करता है।

संस्कृतनिष्ठ बांग्ला भाषा में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1870 के दशक में रचे गए और 1882 के उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल 'वंदे मातरम' ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांति की अलख जगाने का काम किया था। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने औपचारिक घोषणा करते हुए कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका के कारण 'वंदे मातरम' को 'जन गण मन' के समान ही सम्मान और दर्जा दिया जाना चाहिए।

सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। वहीं, विपक्षी दलों ने हंगामे के बीच बिना विस्तृत संसदीय समिति की समीक्षा और बहस के जल्दबाजी में विधेयक पारित कराने के तरीके पर आपत्ति जताई है। बहरहाल, संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Live Today