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'मुझे हेडलाइन नहीं, आउटकम चाहिए'. एंटी पेपर लीक बिल पर बोले राघव चड्ढा, विपक्ष को भी घेरा

'मुझे हेडलाइन नहीं, आउटकम चाहिए'. एंटी पेपर लीक बिल पर बोले राघव चड्ढा, विपक्ष को भी घेरा

एंटी पेपर लीक बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है। गुरुवार को राज्यसभा में इस विधेयक पर लंबी चर्चा हुई, जिसमें कई सांसदों ने अपनी राय रखी। इस दौरान आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बिल का समर्थन करते हुए बताया कि वह अब तक इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से मुखर क्यों नहीं हुए थे।

साथ ही उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा और पेपर लीक के मामलों में सभी सरकारों की जवाबदेही तय करने की बात कही।

राघव चड्ढा ने कहा कि कई लोग उनसे पूछ रहे थे कि वह NEET और पेपर लीक के मुद्दे पर कब बोलेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उनका काम सवाल उठाना था, लेकिन अब उनकी प्राथमिकता समस्या का समाधान करना है। उन्होंने कहा, 'जब मैं विपक्ष में था, तब सवाल मेरा हथियार था। आज समाधान मेरी जिम्मेदारी है। मुझे हेडलाइन नहीं, आउटकम चाहिए। मेरा मकसद कैमरे के सामने मौजूदगी दर्ज कराना नहीं, बल्कि व्यवस्था को ठीक करना है।'

राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक जैसी समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। उन्होंने इसकी तुलना कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से करते हुए कहा कि जिस तरह कैंसर का इलाज केवल दर्द की दवा से नहीं हो सकता, उसी तरह पेपर लीक का समाधान सिर्फ बयानबाजी या मीडिया की सुर्खियों से नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा कानून लेकर आई है, जिससे पेपर लीक करने वालों के मन में कड़ा डर पैदा होगा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव होगी।

अपने भाषण के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही किसी एक दल या राज्य तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा, नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा और 12वीं के अंग्रेजी पेपर लीक का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2016 में कर्नाटक में हुई 12वीं के केमिस्ट्री बोर्ड परीक्षा के पेपर लीक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि री-एग्जाम का पेपर भी लीक हो गया था और जांच के दौरान तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निजी सहायक की गिरफ्तारी हुई थी।

राघव चड्ढा ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना, सवाल पूछना और न्यायालय का दरवाजा खटखटाना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी राजनीतिक दल की रैली में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की लड़ाई परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की है, जबकि राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक लाभ लेने से बचना चाहिए।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Live Uttarpradesh Hindi