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असम: पुलिस गोलीबारी के खिलाफ आहूत 12 घंटे के बंद से दरांग जिले में जनजीवन प्रभावित

गुवाहाटी, 24 सितंबर असम में दरांग जिले के सिपाझार में अतिक्रमण हटाने के दौरान दो लोगों की मौत होने के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदाय के कई संगठनों द्वारा आहूत 12 घंटे के बंद से शुक्रवार को जिले में जनजीवन प्रभावित हुआ।

जिले में बृहस्पतिवार को पुलिस और कथित अतिक्रमणकारियों के बीच हुई झड़पों में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 20 अन्य घायल हो गये।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 'ऑल माइनॉरिटी ऑर्गनाइजेशन कोऑर्डिनेशन कमेटी' द्वारा किये गये बंद में अभी तक किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली है। बंद में 'ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन' (एएएमएसयू) और जमीयत-ए-उलेमा भी शामिल हैं। बंद सुबह पांच बजे शुरू हुआ।

उन्होंने बताया कि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं और सड़कों पर बहुत कम वाहन नजर आए। सिपाझार के गोरोइखुटी, ढोलपुर I और III गांवों में सुरक्षा बल की भारी तैनाती की गई है, जहां अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा था।

कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्यालय मंगलदोई में दरांग उपायुक्त कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रमुख भूपेन बोरा, राज्यसभा सदस्य रिपुन बोरा, कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के उप नेता रकीबुल हुसैन और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

पार्टी प्रवक्ता बबीता शर्मा ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल के उपायुक्त के माध्यम से असम के राज्यपाल जगदीश मुखी को एक ज्ञापन सौंपने की योजना है।

पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने बृहस्पतिवार रात जिले का दौरा किया और कानून एवं व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य का आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) घटना की जांच करेगा।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, '' कुछ तथ्य सामने आए हैं, लेकिन अभी काफी कुछ सामने आना बाकी है। सीआईडी सभी पहलुओं की जांच करेगी।''

डीजीपी ने कहा कि उपायुक्त कार्यालय के उस फोटोग्राफर के खिलाफ मामला दर्ज उसे गिरफ्तार कर लिया गया है, जो एक वीडियो में उस व्यक्ति को लात मारता दिख रहा है, जिसे सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर गोली मारी थी। उक्त व्यक्ति सीआईडी की हिरासत में है।

राज्य सरकार ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा घटना की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की है।

अतिक्रमण से जुड़े विषयों पर सरकार की सामुदायिक कृषि परियोजना प्रभारी एवं भाजपा विधायक पद्मा हजारिका ने कहा कि उपायुक्त के साथ सकारात्मक चर्चा के बाद प्रदर्शनकारी पहले ही हट गए थे। उपायुक्त ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा।

उन्होंने कहा , '' इसके बाद पुलिसकर्मियों पर हमला किसने किया और किसके उकसावे पर किया, इसकी जांच होनी चाहिए। अगर निहित हितों को लगता है कि वे जमीन खाली कराने के अभियान और कृषि परियोजना को रोक सकते हैं, तो वे गलत हैं। परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया जाएगा।''

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बृहस्पतिवार को कहा था कि जमीन खाली कराने के अभियान को नहीं रोका जाएगा और ''अवैध अतिक्रमणकारियों'' को जमीन से हटाने का काम पुलिस को सौंपा गया है और काम पूरा होने तक वह इसे जारी रखेगी।

दरांग जिला प्रशासन ने सोमवार से अब तक 602.4 हेक्टेयर भूमि खाली कराई है और 800 परिवारों को हटाया है। सिपाझार में चार "अवैध रूप से" निर्मित धार्मिक ढांचो को भी ध्वस्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने सात जून को क्षेत्र का दौरा किया था और ढोलपुर शिव मंदिर के पास ''अवैध रूप से रहे रहे लोगों'' द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण किए गए नदी क्षेत्रों का निरीक्षण किया था, साथ ही जिला प्रशासन को सामुदायिक कृषि परियोजना के लिए क्षेत्र को खाली करने का निर्देश दिया था।

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