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50 के हुए युवाओं के पसंदीदा लेखक चेतन, जानें कैसे सिनेमाई पर्दे पर उनकी कहानियों ने रचा इतिहास

50 के हुए युवाओं के पसंदीदा लेखक चेतन, जानें कैसे सिनेमाई पर्दे पर उनकी कहानियों ने रचा इतिहास

मुंबई, 22 अप्रैल (वेब वार्ता)। मशहूर लेखक चेतन भगत के 50वें जन्मदिन के अवसर पर जानें उनकी उन लोकप्रिय किताबों के बारे में, जिन पर बनी फिल्मों ने बॉलीवुड में प्यार, दोस्ती और करियर के संघर्ष को नई परिभाषा दी।

भारतीय साहित्य और बॉलीवुड के बीच के सेतु को मजबूत करने वाले सबसे प्रभावशाली लेखकों में से एक चेतन भगत ने अपनी कहानियों से न केवल पाठकों का मनोरंजन किया है बल्कि सिनेमाई दुनिया को भी कई कल्ट फिल्में दी हैं। आज उनका जन्मदिन है।

22 अप्रैल 1974 को जन्मे चेतन की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे युवाओं के दिल से जुड़े प्यार, दोस्ती, करियर के संघर्ष और पारिवारिक रिश्तों को बहुत ही सरल और प्रभावी ढंग से पेश करते हैं। उनकी लगभग हर बड़ी किताब पर बॉलीवुड में सफल फिल्में बनी हैं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

'3 इडियट्स' और 'काय पो छे' की बेमिसाल सफलता
चेतन भगत के उपन्यास 'फाइव पॉइंट समवन' पर आधारित फिल्म '3 इडियट्स' ने देश की शिक्षा प्रणाली और छात्रों के मानसिक दबाव पर एक बड़ी बहस छेड़ दी थी।

इस फिल्म ने समाज को सिखाया कि डिग्री या नंबरों के पीछे भागने के बजाय उस काम को प्र थमिकता देनी चाहिए जिसमें मन लगे। वहीं, फिल्म 'काय पो छे', जो उनके उपन्यास 'थ्री मिस्टेक्स ऑफ माय लाइफ' से प्रेरित थी, ने दोस्ती और सपनों के बीच आने वाले सामाजिक-राजनीतिक हादसों और गलतफहमियों को खूबसूरती से पर्दे पर उतारा। सुशांत सिंह राजपूत और राजकुमार राव अभिनीत इस फिल्म को समीक्षकों ने भी काफी सराहा।

रिश्तों की नई परिभाषा
चेतन भगत ने अपनी कहानियों के माध्यम से भारतीय विवाहों और आधुनिक रिश्तों की जटिलताओं को भी बखूबी दिखाया है। 'टू स्टेट्स' में एक पंजाबी लड़के और तमिल लड़की की प्रेम कहानी के जरिए यह दिखाया गया कि भारत में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं बल्कि दो परिवारों का मेल होती है।

इसी कड़ी में 2017 में आई फिल्म 'हाफ गर्लफ्रेंड' ने बिहार के एक ऐसे लड़के (माधव) की कहानी पेश की, जो भाषा की बाधाओं और रिश्तों की अधूरी पहचान के बीच अपने प्यार को ढूंढता है।

सपनों का संघर्ष और 'हैलो'
बॉलीवुड में उनकी यात्रा उपन्यास 'वन नाइट एट कॉल सेंटर' पर आधारित फिल्म 'हैलो' के साथ भी यादगार रही, जिसमें कॉल सेंटर में काम करने वाले युवाओं की परेशानियों और उनकी जिंदगी में आने वाले एक जादुई मोड़ (भगवान का फोन) को दिखाया गया था।

चेतन भगत की इन कहानियों ने न केवल सिनेमा को नई कहानियां दीं बल्कि एक ऐसी शैली विकसित की जिससे देश का युवा जुड़ाव महसूस कर सका। आज उनके 50वें जन्मदिन पर उनकी इन कालजयी कृतियों और उन पर बनी फिल्मों को एक बार फिर याद किया जा रहा है।

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