नई दिल्ली, 01 सितंबर (वेब वार्ता)। दिल्ली-NCR में चलती स्लीपर बस में 16 साल की लड़की के साथ गैंगरेप कांड ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट और राजधानी दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में बस और रास्ते दोनों जगह सुरक्षा व्यवस्था में चूक की बात सामने आई हैं। उदाहरण के तौर पर सड़कों पर चेकप्वाइंट और पुलिस का न होना। इसी तरह बस में परदे लगे होना या फिर सीसीटीवी का काम न करना, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक बस ड्राइवर और कंडक्टर ने नाबालिग लड़की के साथ हैवानियत की। इस 43 किलोमीटर के रास्ते में अगर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होती, तो क्या ऐसी नौबत आती? घटना के बाद बस और रास्ते पर सुरक्षा से जुड़ी 7 खामियां सामने आई हैं।
1. 43 किलोमीटर में सिर्फ दो चेकपॉइंट
पुलिस के मुताबिक, परी चॉक से कश्मीरी गेट तक करीब 43 किलोमीटर के रास्ते में जांचकर्ताओं को केवल दो प्रॉपर चेकप्वाइंट्स मिले। ऐसे में सवाल है कि इतनी लंबी दूरी तक बस बिना नियमित जांच के कैसे गुजरती रही।
2. कई जगह बैरिकेडिंग थी, लेकिन पुलिसकर्मी नहीं
जांच में मयूर विहार के पास दिल्ली नोएडा इंटरसेक्शन पर सड़क किनारे भारी बैरिकेडिंग मिली, लेकिन रात के समय वहां पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे। यानी निगरानी के लिए ढांचा था, लेकिन मौके पर पुलिस की मौजूदगी नहीं थी।
3. महत्वपूर्ण चौराहे पर CCTV भी नहीं
मयूर विहार इंटरसेक्शन जैसे व्यस्त इलाके में ट्रैफिक सिग्नल पर CCTV कैमरे मौजूद नहीं होने की बात सामने आई है। यह वही रूट था, जिससे होकर बस दिल्ली की तरफ बढ़ी।
4. बस का अपना CCTV भी बंद था
ट्रैवल कंपनी के मुताबिक, बस में लगे CCTV कैमरे उस समय काम नहीं कर रहे थे। बस मरम्मत के दौर से गुजर रही थी। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सबसे अहम निगरानी व्यवस्था ही बंद थी।
5. स्लीपर बस की खिड़कियों और बर्थ पर लगे थे पर्दे
बस के स्लीपर बर्थ में कंपनी की ओर से परदे लगाए गए थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, इन पर्दों की वजह से बाहर से अंदर होने वाली गतिविधियां दिखाई नहीं देती थीं। इससे बस के अंदर होने वाली किसी घटना की निगरानी और मुश्किल हो गई।
6. बस नियमित यात्री सेवा पर नहीं थी, तो लड़की को बैठाया क्यों
घटना की रात बस सामान्य दिनों की तरह सवारियों को लेकर नहीं जा रही थी। ट्रैवल कंपनी और जांचकर्ताओं के मुताबिक, तकनीकी खराबी के बाद बस को सूरजपुर की वर्कशॉप में मरम्मत के लिए भेजा गया था और वहां से उसे पेंट करने के लिए कश्मीरी गेट ले जाया जा रहा था।
ऐसे में सवाल उठ रहा है, जब बस नियमित यात्री सेवा पर नहीं थी, तो लड़की को रास्ते में बैठाया क्यों? बस नियमित सेवा में नहीं थी, इसके बावजूद परी चॉक के पास बारिश और अंधेरे में लड़की को बस में बैठाया गया। पुलिस के मुताबिक, कंडक्टर ने उसे सेक्टर 63 छोड़ने की बात कही थी। अब जांच इस पहलू को भी देख रही है कि आरोपियों ने उसे बस में क्यों बैठाया।
7. कश्मीरी गेट पर भी नहीं था चेकप्वाइंट
जिस जगह लड़की को बस से उतारा गया, वहां भी जांच में कोई प्रॉपर बेरिकेडिंग या चेक प्वाइंट नहीं मिला। यानी बस ग्रेटर नोएडा से निकलकर दिल्ली के उत्तरी हिस्से तक पहुंच गई, लेकिन लगातार फिजिकल चेकिंग नहीं हो सकी।
पुलिस अब पूरे रूट का नक्शा तैयार कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रास्ते में मौजूद CCTV, पुलिस चौकियों और निगरानी तंत्र ने बस की आवाजाही को किस हद तक रिकॉर्ड किया। बस को जब्त कर फोरेंसिक जांच भी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि नियम और सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद उनका जमीन पर कितना प्रभावी पालन हो रहा है।

