नई दिल्ली, 29 अगस्त (वेब वार्ता)। सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर आंदोलन के करीब एक महीने बाद अपनी भूख हड़ताल, सरकार से बातचीत और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को लेकर कई अहम बातें कहीं।
सीजेपी के आने वाले आंदोलनों में अपनी भूमिका को लेकर वांगचुक ने अपनी तुलना बुलडोजर से करते हुए कहा कि उनका काम दूसरों के लिए राह बनाना है। सीजेपी आंदोलन की सफलता के लिए प्रमुख किरदार रहे वांगचुक ने कहा कि यदि उनकी आवश्यकता होगी तो वह आगे भी अच्छे मुद्दों पर अपना समर्थन देने के लिए तैयार। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि ऑनरेरी कॉकरोच हैं, क्योंकि उम्र अधिक होने और आलसी ना होने की वजह से वह कॉकरोच बनने की योग्यता नहीं रखते हैं।
एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने बताया कि कैसे लद्दाख के एलजी वीके सक्सेना ने उन्हें कहा था कि सीजेपी के पीछे पाकिस्तान और अमेरिका जैसे देश हैं और उनका समर्थन नहीं करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के बारे में अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश की और अभिजीत दीपके से संपर्क में आए। बातचीत के बाद उन्हें लगा कि मंशा गलत नहीं है और ना ही विदेशी ताकत इनके पीछे है। वांगचुक ने कहा कि इसके बाद उन्होंने सीजेपी के साथ खड़े होने का फैसला किया और ऐलान कर दिया कि यदि दीपके को भारत आने के बाद गिरफ्तार किया जाता है तो वह भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।
वांगचुक से पूछा गया कि क्या वह सीजेपी के साथ मिलकर सरकार से बातचीत करेंगे और आगे आंदोलनों में उनकी क्या भूमिका होगी? सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि वह अच्छे मुद्दों पर साथ देते रहेंगे और सीजेपी को समर्थन की आवश्यकता होगी तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'मैं देश दुनिया के किसी भी अच्छे मुद्दे पर समर्थन के लिए तैयार हूं। कल मैं सीजेपी का समर्थन करने के लिए वहां (जंतर-मंतर) था, उससे पहले लद्दाख के मुद्दों पर वहां था। मैं कुछ सफलता हासिल कर चुका हूं और कुछ का इंतजार कर रहा हूं। जैसे लद्दाख के मामले में जब लोकतंत्र बहाल हो जाएगा और सुरक्षा के उपाय लागू हो जाएंगे, तब शायद मेरी कोई भूमिका नहीं रहेगी। मैं अन्य किसी मुद्दे पर ध्यान दूंगा।'
उन्होंने कहा, 'इसी तरह मेरी आवश्यकता होगी तो मैं मुद्दों पर हमेशा समर्थन करूंगा। यदि वे खुद अच्छे निष्कर्ष पर पहुंच गए हैं और सुचारू रूप से चल रहे हैं तो मैं आगे बढ़ने के लिए तैयार हूं। मैं खुद को बुलडोजर कहता हूं, कार नहीं। बुलडोजर का इस्तेमाल रोड बनाने के लिए होता है। एक बार जब रोड बन जाए आप नहीं चाहेंगे कि उस पर बुलडोजर चले। एक बार रोड बन जाने के बाद जब आवाजाही शुरू हो जाए तो मेरी भूमिका समाप्त हो जाएगी, मैं नई सड़क के लिए एक और पहाड़ काट रहा हूंगा।'

