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सेवा और साधना की जीवंत मिसाल: प्रशांत महाराज जी का शिवशक्ति अनुग्रह पीठ

सेवा और साधना की जीवंत मिसाल: प्रशांत महाराज जी का शिवशक्ति अनुग्रह पीठ

भोपाल (मध्य प्रदेश), फरवरी 28: मौन साधना से जनसेवा तक, समाज परिवर्तन का एक दिव्य अभियान

पहाड़ों की गुफाओं में की गई दीर्घकालीन मौन साधना और समाज सेवा का दृढ़ संकल्प - यही शिवशक्ति अनुग्रह पीठ की पहचान है।

प्रशांत महाराज जी आज भी अपना अधिकांश समय साधना में व्यतीत करते हैं, किंतु उनकी साधना का प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से पीठ द्वारा संचालित निःशुल्क सेवाओं में स्पष्ट दिखाई देता है।

प्रशांत महाराज जी का स्पष्ट संदेश है - "सेवा ही शिवत्व है।" उनका मानना है कि संत का कर्तव्य लेना नहीं, बल्कि देना होता है। इसी विचारधारा के साथ शिवशक्ति अनुग्रह पीठ समाज के जरूरतमंद वर्ग के लिए अनेक निःशुल्क सेवाएँ संचालित कर रहा है।

प्रशांत महाराज जी कई बार लगातार 41 दिनों तक मौन व्रत के साथ कठोर साधना कर चुके हैं। उन्होंने पहाड़ों, जंगलों और एकांत स्थलों में वर्षों तक ध्यान साधना की है। कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने अन्न का त्याग भी किया।

उनका जीवन त्याग, अनुशासन और आत्मसंयम का जीवंत उदाहरण माना जाता है। पीठ की गतिविधियाँ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, वृद्ध सेवा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में व्यापक रूप से कार्य कर रही हैं।

नियमित रूप से निःशुल्क मेडिकल कैंप आयोजित किए जाते हैं। अन्नपूर्णा रसोई के माध्यम से निर्धन एवं असहाय लोगों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जाता है। गौ सेवा हेतु गोशाला संचालित की जा रही है। असहाय व्यक्तियों के लिए आवास की व्यवस्था भी की गई है।

बालकों के लिए वात्सल्य बालधाम, बुजुर्गों के लिए "पूज्य ज्येष्ठजन धाम ", तथा संस्कृत एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु विद्यापीठ संचालित किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त सामूहिक विवाह, महिलाओं को स्वरोजगार हेतु सहायता, साइकिल वितरण तथा ग्रामीण विकास से जुड़े अनेक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।

पीठ ने आधुनिक तकनीक को भी अपनाया है। स्वास्थ्य सेवाओं एवं सेवा कार्यों को सुव्यवस्थित करने हेतु डिजिटल प्रणाली विकसित की गई है। आने वाले समय में 108 से अधिक गाँवों में सेवा केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएँ सुलभ हो सकें।

पीठ की एक विशेष नीति यह है कि सहायता लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान सर्वोपरि है। कागजी प्रक्रिया को सरल रखा जाता है, ताकि किसी को अपमान या संकोच का अनुभव न हो। पीठ का विश्वास है कि सेवा तभी पूर्ण होती है जब उसमें सम्मान जुड़ा हो।

प्रशांत महाराज जी के विचार उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देते हैं। वे कहते हैं - "सच्ची सेवा में ही ईश्वर की कृपा स्वतः प्राप्त होती है।"
साथ ही उनका दिव्य संदेश है - "सेवा से करुणा जन्म लेती है और साधना से आत्मा प्रकाशित होती है। यही शिवशक्ति अनुग्रह पीठ का दिव्य संदेश है।"

शिवशक्ति अनुग्रह पीठ का संकल्प है - "इन कुरीतियों को ज्ञान के प्रकाश से मिटाना और वैदिक सनातन की पुनः स्थापना करना।
जहाँ धर्म भय नहीं, बल्कि प्रेम और ज्ञान बने।"

छोटे स्तर से प्रारंभ हुआ यह सेवा कार्य आज हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। किसी को भोजन मिला, किसी को उपचार, किसी बच्चे को शिक्षा का अवसर मिला, तो किसी गाँव को नई दिशा प्राप्त हुई।

आने वाले समय में शिवशक्ति अनुग्रह पीठ का उद्देश्य और अधिक लोगों तक पहुँच बनाकर समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
शिवशक्ति अनुग्रह पीठ यह सिद्ध कर रहा है कि - सच्ची भक्ति वही है जो किसी के जीवन में प्रकाश बनकर प्रवेश करे।

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