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सूरत : भेस्तान हाउसिंग के निवासी सड़कों पर उतरे, पुनर्वास की मांग को लेकर नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन

सूरत : भेस्तान हाउसिंग के निवासी सड़कों पर उतरे, पुनर्वास की मांग को लेकर नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन

सूरत। सूरत नगर निगम की आवास योजना के तहत बने भेस्तान क्षेत्र के भीमनगर हाउसिंग (टी.पी.-22, फाइनल प्लॉट नं. 23) और सरस्वती हाउसिंग (टी.पी.-22, फाइनल प्लॉट नं. 70) के निवासियों ने सोमवार को तापी भवन स्थित नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जर्जर हो चुके मकानों को खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उन्हें न तो वैकल्पिक आवास दिया गया है और न ही किराया सहायता उपलब्ध कराई गई है।

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि नगर निगम ने झुग्गियों के स्थान पर उन्हें पक्के मकान तो उपलब्ध कराए, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब रही।

उनका आरोप है कि मकान बनने के कुछ ही समय बाद दीवारों और स्लैब में दरारें पड़ने लगीं और पिछले लगभग दस वर्षों से सैकड़ों परिवार असुरक्षित भवनों में रहने को मजबूर हैं। अब प्रशासन मकान खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है, लेकिन पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।

प्रदर्शन के दौरान तेज बारिश शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग तापी भवन के बाहर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उन्हें रहने के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था या किराया सहायता नहीं मिलती, तब तक वे अपने मकान खाली नहीं करेंगे।

स्थानीय निवासी हेमाबेन भीखूभाई राठौड़ ने कहा कि वर्ष 2016 से वे न्याय की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल नोटिस देकर चले जाते हैं।

उन्होंने कहा, "हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि या तो हमें किराया दिया जाए या रहने के लिए दूसरी जगह उपलब्ध कराई जाए। हमारी पुरानी झोपड़ियां इन जर्जर पक्के मकानों से अधिक सुरक्षित थीं। पहले भी यहां भवन दुर्घटना में दो लड़कियों की मौत हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।"

सामाजिक कार्यकर्ता मनोज चांदला, जो लंबे समय से प्रभावित परिवारों के साथ जुड़े हुए हैं, ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में नगर निगम को 70 से 80 से अधिक पत्र भेजे गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि सरस्वती हाउसिंग को वर्ष 2021 में खाली कराकर लोगों को वैकल्पिक आवास दिया गया था, लेकिन वह भवन भी कुछ वर्षों में जर्जर हो गया और वर्ष 2024 में उसे भी खाली करने के नोटिस जारी कर दिए गए।

चांदला ने आरोप लगाया कि प्रशासन लगातार वैकल्पिक आवास उपलब्ध न होने का हवाला देता है, जबकि जरूरत पड़ने पर अन्य परियोजनाओं में तत्काल व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को स्थायी और सुरक्षित पुनर्वास नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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