शहर में बार-बार बाढ़ की स्थिति से परेशान लोगों का आक्रोश अब आंदोलन में बदलता दिखाई दे रहा है। पर्वत पाटिया और आसपास के इलाकों में पिछले 25 दिनों में तीन बार बाढ़ की स्थिति बनने से स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी है।
स्थायी समाधान की मांग को लेकर 15 से अधिक सोसाइटियों के लोगों ने मिलकर 'जन आंदोलन समिति' का गठन किया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर बार भारी बारिश के बाद क्षेत्र में बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे जनजीवन प्रभावित होने के साथ लोगों को आर्थिक नुकसान और रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बार-बार समस्या सामने आने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
निवासियों ने स्पष्ट किया है कि वे अब केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। उनका कहना है कि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। यदि प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो गांधीनगर तक पदयात्रा, बाइक रैली और भूख हड़ताल जैसे आंदोलन किए जाएंगे।
सूरत के सांसद मुकेश दलाल ने भी बाढ़ की समस्या को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि खाड़ी पर मानवीय दबाव और पानी के प्राकृतिक बहाव में आई रुकावटें बाढ़ की समस्या का प्रमुख कारण हैं। वर्षों पहले हुए दबाव से बहाव बाधित होने के कारण स्थिति और गंभीर हुई है।
सांसद के मुताबिक खाड़ी में मौजूद रुकावटों को दूर करने और समस्या का स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही सूरत शहर की सभी सात खाड़ियों का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा, ताकि दीर्घकालिक स्तर पर आवश्यक कार्ययोजना तैयार की जा सके। उन्होंने लगातार बाढ़ का सामना कर रहे लोगों के आक्रोश को जायज बताते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

