नासिरनगर में 30 मई को हुए विवादित ध्वस्तीकरण मामले में गुजरात हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मंगलवार को सूरत महानगरपालिका के सेंट्रल जोन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी।
हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने और उनके पुनर्वास के लिए उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद शुरुआती दौर में मनपा ने अपनी भूमिका से इनकार किया था। हालांकि, बाद में मनपा आयुक्त की ओर से कार्रवाई में मनपा की संलिप्तता स्वीकार किए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत के निर्देश के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मनपा की टीम मंगलवार को सर्वे के लिए नासिरनगर पहुंची। शुरुआत में टीम ने केवल 26 याचिकाकर्ताओं के मकानों का सर्वे शुरू किया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। मौके पर पहुंचे स्थानीय पार्षद अरशद जरीवाला, असलम साइकिलवाला और अधिवक्ता धवल राणा ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने सभी प्रभावित परिवारों को सर्वे में शामिल करने की मांग की। इसके बाद मनपा ने सर्वे का दायरा बढ़ाते हुए सभी प्रभावित परिवारों को प्रक्रिया में शामिल कर लिया।
अधिवक्ता धवल राणा के अनुसार, मनपा ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में 59 मकानों के ध्वस्तीकरण की बात स्वीकार की है। हलफनामे में पुनर्वास के लिए 120 वैकल्पिक आवास उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई है। उन्होंने बताया कि सर्वे प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी 59 प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उपलब्ध वैकल्पिक आवास आवंटित किए जाएंगे। इससे ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

