सूरत, 31 अगस्त 2026। पॉलिएस्टर यार्न की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। चैंबर ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह को विस्तृत तकनीकी पत्र के साथ दो वर्षों के आंकड़ों पर आधारित डेटा एनालिसिस रिपोर्ट भेजकर पॉलिएस्टर वैल्यू चेन में कीमतों की असामान्य बढ़ोतरी पर चिंता जताई है।
चैंबर के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा 15 जुलाई 2026 से एमईजी और पीटीए पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (बीसीडी) की छूट हटाए जाने के बाद घरेलू बाजार में पॉलिएस्टर मेल्ट और पीओवाय की कीमतों में असामान्य वृद्धि देखने को मिली है।
24 अगस्त को कपड़ा मंत्रालय के साथ हुई ऑनलाइन बैठक के बाद एसजीसीसीआई अध्यक्ष श्री अशोक जीरावाला ने सरकार के समक्ष डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल इंडस्ट्री, विशेषकर सूरत के एमएसएमई बुनकरों और टेक्सचराइज़र पर पड़ रहे अतिरिक्त लागत बोझ का मुद्दा उठाया।
चैंबर ने रिपोर्ट में 'डेल्टा रेशियो' के माध्यम से पॉलिएस्टर की कीमतों और कच्चे तेल की कीमतों के बीच संबंध का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान्य ट्रेंड के अनुसार क्रूड ऑयल की कीमत में प्रत्येक 5 डॉलर प्रति बैरल के बदलाव के मुकाबले पॉलिएस्टर मेल्ट की कीमत में करीब ₹2 प्रति किलो का बदलाव अपेक्षित है।
चैंबर के अनुसार, 22 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड की कीमत 92.74 डॉलर प्रति बैरल थी। इस आधार पर मेल्ट की आदर्श कीमत करीब ₹97.81 प्रति किलो होनी चाहिए थी, जबकि घरेलू बाजार में इसकी कीमत ₹105.73 प्रति किलो रही। यानी मेल्ट स्तर पर ही करीब ₹7.92 प्रति किलो का अतिरिक्त बोझ सामने आया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सामान्य परिस्थितियों में मेल्ट से पीओवाय बनाने का कन्वर्जन डेल्टा लागत और उचित मुनाफे सहित करीब ₹15 से ₹16 प्रति किलो रहता है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में यह बढ़कर ₹29.07 प्रति किलो तक पहुंच गया है।
चैंबर के मुताबिक, इससे पीओवाय स्तर पर करीब ₹12 प्रति किलो का अतिरिक्त डेल्टा बोझ पैदा हुआ है। मेल्ट स्तर के ₹7.92 और पीओवाय कन्वर्जन के करीब ₹12 अतिरिक्त बोझ को मिलाकर डाउनस्ट्रीम उद्योग पर लगभग ₹20 प्रति किलो का अनुचित अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
सूरत टेक्सटाइल क्लस्टर में हर महीने करीब 1.52 लाख मीट्रिक टन पॉलिएस्टर यार्न की खपत होती है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा डीटीवाय का है। चैंबर ने दावा किया है कि घरेलू स्तर पर पॉलिएस्टर मेल्ट के उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के पास होने के कारण बाजार में कीमत निर्धारण को लेकर असंतुलन की स्थिति बन रही है।
चैंबर के अनुसार, भारतीय उत्पादकों की तुलना में चीनी मैन्युफैक्चरर्स को पीओवाय करीब ₹15 प्रति किलो कम कीमत पर उपलब्ध हो रहा है। इससे भारतीय एमएसएमई बुनकरों और टेक्सचराइज़र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है और उनकी कार्यशील पूंजी पर भी दबाव बढ़ रहा है।
एसजीसीसीआई ने टेक्सटाइल इंडस्ट्री को राहत देने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे हैं। इनमें प्रमुख रूप से-
एमईजी और पीटीए पर बीसीडी छूट को तत्काल अगले 6 से 12 महीनों के लिए बहाल किया जाए।
घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति बढ़ाने के लिए पीओवाय और डीटीवाय के आयात को आसान बनाया जाए तथा सीमित अवधि के लिए कस्टम ड्यूटी में राहत दी जाए।
आयातित यार्न की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कंटेनर किराए में राहत दी जाए।
अंतरराष्ट्रीय कच्चे माल की कीमतों और करेंसी रेट के आधार पर हर दो सप्ताह में पारदर्शी यार्न प्राइस बेंचमार्क तय करने की व्यवस्था बनाई जाए।
टेक्सटाइल मंत्रालय, कच्चे माल के निर्माताओं, बुनकरों, टेक्सचराइज़र और एसजीसीसीआई के प्रतिनिधियों को शामिल कर 'प्राइस स्टेबिलाइजेशन कमेटी' का गठन किया जाए।
असामान्य कीमत वृद्धि से प्रभावित एमएसएमई यूनिट्स के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन और वर्किंग कैपिटल सपोर्ट उपलब्ध कराया जाए।
सूरत में पावरटैक्स स्कीम के तहत 20 यार्न बैंक स्थापित किए जाएं, जिससे छोटे उद्योगों को कच्चे माल की उपलब्धता और कीमतों में स्थिरता मिल सके।
चैंबर ने कहा है कि यदि पॉलिएस्टर यार्न की कीमतों में इस तरह की असामान्य बढ़ोतरी जारी रहती है, तो इसका सीधा असर सूरत सहित देशभर के डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता, एमएसएमई यूनिट्स की कार्यशील पूंजी और रोजगार पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर कीमतों को स्थिर करने और टेक्सटाइल उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।

