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सूरत : सिविल अस्पताल में नवजातों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक RFID सिस्टम शुरू

सूरत : सिविल अस्पताल में नवजातों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक RFID सिस्टम शुरू

सूरत। सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन सूरत के नए सिविल अस्पताल ने नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाकर दक्षिण गुजरात में एक नई मिसाल पेश की है।

अस्पताल प्रशासन ने नवजात शिशुओं की चोरी जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से नियोनेटल आईसीयू (NICU) के बाहर हाई-टेक RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) आधारित एंटी-थेफ्ट सुरक्षा प्रणाली शुरू की है।

इस नई व्यवस्था के तहत किसी भी नवजात को डॉक्टरों की अनुमति के बिना वार्ड से बाहर ले जाने की कोशिश होने पर प्रवेश द्वार पर लगे सेंसर तुरंत अलार्म बजा देंगे, जिससे सुरक्षा कर्मी तत्काल सतर्क हो जाएंगे।

सिविल अस्पताल की प्रभारी अधीक्षक डॉ. पारुल वडगामा ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले अस्पताल से एक नवजात के चोरी होने की घटना सामने आई थी। हालांकि बच्चे को दो दिन बाद सुरक्षित बरामद कर लिया गया था, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी और तकनीकी समाधान के रूप में RFID प्रणाली लागू की गई है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल यह व्यवस्था NICU में भर्ती एक वर्ष तक के बच्चों के लिए लागू की गई है। अगले 10 से 15 दिनों के भीतर इसी तरह की सुरक्षा प्रणाली प्रसूति (गायनेकोलॉजी) वार्ड में भी स्थापित कर दी जाएगी, जहां बड़ी संख्या में नवजात शिशु भर्ती रहते हैं।

मॉल की एंटी-थेफ्ट तकनीक की तर्ज पर काम करेगा सिस्टम

पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. जिग्नेश पाटडिया ने बताया कि यह प्रणाली उसी तकनीक पर आधारित है, जिसका उपयोग बड़े शॉपिंग मॉल और ब्रांडेड स्टोर्स में चोरी रोकने के लिए किया जाता है।

प्रत्येक नवजात के हाथ या पैर में विशेष RFID टैग लगाया जाता है। यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति बच्चे को वार्ड से बाहर ले जाने का प्रयास करता है तो प्रवेश द्वार पर लगे सेंसर टैग को पहचानकर तुरंत अलार्म सक्रिय कर देते हैं।

डॉ. पाटडिया ने बताया कि यदि किसी बच्चे को CT स्कैन, MRI या अन्य जांच के लिए वार्ड से बाहर ले जाना हो तो उसके लिए भी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई गई है। ऐसे मामलों में नर्सिंग स्टाफ पहले सुरक्षा विभाग को सूचित करेगा तथा आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही बच्चे को बाहर ले जाया जाएगा। सामान्यतः ऐसे समय संबंधित चिकित्सक भी बच्चे के साथ मौजूद रहेगा।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार RFID टैग विशेष तरीके से लगाया जाता है, जिसे केवल अधिकृत डॉक्टर या नर्स ही हटा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति जबरन टैग काटने या हटाने का प्रयास करता है तो बच्चा असहज होकर रोने लगता है, जिससे आसपास मौजूद स्टाफ तुरंत सतर्क हो जाता है।

अस्पताल में नवजातों की सुरक्षा के लिए तीन स्तर की निगरानी व्यवस्था लागू की गई है-

RFID सेंसर सिस्टम, जो अनधिकृत गतिविधि पर तुरंत अलार्म बजाता है।
महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, जो NICU के प्रवेश द्वार पर आने-जाने वालों की निगरानी करती हैं।
24 घंटे CCTV निगरानी, जिसका सीधा नियंत्रण अस्पताल के कंट्रोल रूम से किया जाता है।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ICU के बाहर अनावश्यक भीड़ रोकने और संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए आधुनिक पब्लिक एड्रेस (माइक) सिस्टम भी शुरू किया गया है। इसके माध्यम से परिजनों को दवाइयों, जांच या बच्चे की स्थिति से संबंधित आवश्यक जानकारी समय-समय पर दी जाती है, जिससे उन्हें बार-बार ICU के अंदर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

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