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सूरत : वराछा में बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 14 बच्चों को कराया गया मुक्त

सूरत : वराछा में बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 14 बच्चों को कराया गया मुक्त

सूरत। बाल मजदूरी उन्मूलन अभियान के तहत सूरत डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स ने वराछा क्षेत्र की मुक्तिधाम सोसाइटी में विशेष जांच अभियान चलाकर 14 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया। सभी बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

30 मई को आयोजित इस विशेष अभियान में श्रम विभाग, सूरत महानगरपालिका, फैक्ट्री निरीक्षण विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, AHTU, शी-टीम तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।

जांच के दौरान हॉट फिक्सिंग कार्य से जुड़ी विभिन्न इकाइयों और घरों की तलाशी ली गई। इस दौरान कुल 14 बच्चे काम करते हुए पाए गए, जिनमें 6 किशोर लड़के, 4 बाल मजदूर तथा 4 किशोरियां शामिल थीं। सभी बच्चे राजस्थान और बिहार के निवासी बताए गए हैं।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि बच्चों की आयु लगभग 10 से 17 वर्ष तथा किशोरियों की आयु 14 से 18 वर्ष के बीच है। वे पिछले एक-दो महीनों से कार्यरत थे और प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक काम करते थे। उन्हें दोपहर में एक घंटे का विश्राम दिया जाता था। बच्चों को प्रतिमाह 5,000 से 10,000 रुपये तक वेतन दिया जा रहा था।

जांच के दौरान किसी भी बच्चे के पास आयु संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले। इसके चलते सभी बच्चों को तत्काल बाल मजदूरी से मुक्त कराकर बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

मुक्त कराए गए लड़कों को वी.आर. पोपावाला चिल्ड्रन्स होम, कतारगाम तथा लड़कियों को चिल्ड्रन्स होम फॉर गर्ल्स, रांदेर में सुरक्षित रखा गया है।

जिला बाल संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बच्चों की आयु संबंधी दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि के बाद संबंधित मालिकों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम तथा अन्य लागू कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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