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अब 12वीं की परीक्षा कागज पर नहीं होगी?

अब 12वीं की परीक्षा कागज पर नहीं होगी?

मुंबई/दि.2-इस वर्ष महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का 12वीं का रिजल्ट 89.79% लगा है, जिसमें कोकण विभाग अव्वल रहा. लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारी. पर्यावरण संरक्षण के लिए बोर्ड भविष्य में 12वीं की परीक्षा डिजिटल रूप से लेने पर विचार कर रहा है.

साथ ही अब रिजल्ट के 15 दिनों के भीतर मार्कशीट और सर्टिफिकेट मिलेंगे, जिन पर फोटो और टठ कोड होगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी.
महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा फरवरी-मार्च में आयोजित 12वीं की परीक्षा का रिजल्ट आज घोषित किया गया. राज्य का कुल परिणाम 89.79% रहा, जिसमें हर साल की तरह कोकण विभाग का परिणाम सबसे अधिक 94% रहा. वहीं लातूर का परिणाम सबसे कम 84% रहा. इस साल भी लड़कियों ने बाजी मारी है, जहां 93.15% लड़कियां और 86.80% लड़के उत्तीर्ण हुए हैं. रिजल्ट का विस्तृत विश्लेषण करते हुए बोर्ड ने बताया कि पारदर्शिता और गति बढ़ाने के लिए मार्कशीट में कुछ बदलाव किए गए हैं. साथ ही कागज के बड़े पैमाने पर उपयोग को देखते हुए भविष्य में बदलाव के संकेत भी दिए गए हैं. 12वीं की परीक्षा कागज पर लेने को लेकर बोर्ड बड़ा निर्णय लेने की तैयारी में है.
* क्या दिए गए संकेत?
रिजल्ट की जानकारी देते समय अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा के लिए लगभग 2000 मैट्रिक टन कागज का उपयोग होता है. कागज पेड़ों से बनता है और ग्लोबल वॉर्मिंग तथा क्लाइमेट चेंज जैसी समस्याओं को देखते हुए अब यह विचार किया जा रहा है कि क्या 12वीं की परीक्षा डिजिटल तरीके से ली जा सकती है. हर साल लगभग 20-20 टन के 100 ट्रकों के बराबर कागज उपयोग में आता है, जो पर्यावरण के लिए बड़ा नुकसान है. इसलिए अब 12वीं की परीक्षा कागज के बजाय डिजिटल होने की संभावना है. यह बड़ा बदलाव जल्द हो सकता है. इस दौरान बारामती के केंद्र पर प्रश्नपत्र ले जाने के लिए जीपीएस ट्रंक का उपयोग किया गया था, जिससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ रोकी जा सके. यह प्रयोग सफल रहा.
* अब मार्कशीट और सर्टिफिकेट एक ही दिन
पहले रिजल्ट के बाद मार्कशीट 10 दिन में मिलती थी, जबकि सर्टिफिकेट 6 महीने बाद मिलता था. लेकिन अब पहली बार मार्कशीट और सर्टिफिकेट एक ही दिन मिलेंगे. यानी रिजल्ट के 15वें दिन दोनों दस्तावेज मिल जाएंगे. मार्कशीट पर छात्र का फोटो और क्यूआर कोड होगा. इससे लगभग 3 करोड़ रुपये की बचत भी हुई है. पहले मार्कशीट और सर्टिफिकेट पर पहले उपनाम (सरनेम) आता था, लेकिन अब आधार की तरह पहले छात्र का नाम, फिर पिता का नाम और फिर उपनाम दिया जाएगा.

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