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अमरावती जीएमसी की जमीन को लेकर फिर फंसा पेच

अमरावती जीएमसी की जमीन को लेकर फिर फंसा पेच

* शहर के मध्यस्थल पर सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने की उठाई मांगमुंबई/अमरावती/दि.3- अमरावती में प्रस्तावित शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय (जीएमसी) की जमीन को लेकर राज्य विधान परिषद में बड़ा मुद्दा उठाया गया.

विधायक संजय खोडके ने सरकार से मांग की कि मौजे आलियाबाद में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की जमीन पर मौजूद कानूनी और तकनीकी अड़चनों को देखते हुए वैकल्पिक स्थानों पर प्राथमिकता से विचार किया जाए. विधान परिषद में प्रश्न उठाते हुए विधायक संजय खोडके ने कहा कि मौजे आलियाबाद स्थित प्रस्तावित भूमि वन विभाग के अधीन आयडेंटिफाइड फॉरेस्ट क्षेत्र में आती है. ऐसे में केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना वहां किसी भी प्रकार का गैर-वन निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि यह स्थान अमरावती शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर है, जिससे आम मरीजों और विद्यार्थियों को भारी असुविधा होगी.
विधायक संजय खोडके ने सदन को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2024 में अमरावती सहित राज्य के 10 जिलों में शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालयों की घोषणा की गई थी. इन संस्थानों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और नए डॉक्टर तैयार करना है. इसलिए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का निर्माण शहर के मध्यवर्ती क्षेत्र में होना चाहिए, जहां पहले से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं.
* चार वैकल्पिक स्थलों का प्रस्ताव
इस मुद्दे को विधान परिषद में पुरजोर तरीके से उठाते हुए विधायक खोडके ने सरकार के समक्ष मेडिकल कॉलेज के लिए चार वैकल्पिक स्थान सुझाए हैं, जिनमें जिला स्त्री रुग्णालय एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल परिसर की 23 एकड़ भूमि, डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के वेलकम पॉइंट क्षेत्र में उपलब्ध भूमि, रहाटगांव (सर्वे नंबर 121) स्थित लगभग 23 एकड़ भूमि व मोसीकॉल परिसर में कपास पणन महासंघ की लगभग 25 एकड़ जमीन के पर्यायों का समावेश है. विधायक खोडके ने कहा कि इनमें से किसी एक स्थान का चयन कर परियोजना को गति दी जानी चाहिए.
* एडीबी सर्वे में सामने आई वन भूमि की बाधा
विधायक संजय खोडके ने बताया कि मेडिकल कॉलेज परियोजना को एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से वित्तीय सहायता मिलने वाली है. इसी संदर्भ में हुए पर्यावरणीय सर्वेक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रस्तावित भूमि वन क्षेत्र की श्रेणी में आती है. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम, 1980 के तहत केंद्र सरकार की अनुमति के बिना यहां निर्माण संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले ही परियोजना में देरी हो चुकी है और अब वन संबंधी अनुमति प्रक्रिया के कारण और अधिक विलंब होने की आशंका है. यदि 600 से 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला मेडिकल कॉलेज शहर से इतनी दूर स्थापित किया जाता है, तो उसकी उपयोगिता भी प्रभावित होगी.
* केंद्र सरकार के निर्णय के बाद होगा अंतिम फैसला
इस मुद्दे पर जवाब देते हुए राज्य के वैद्यकीय शिक्षण मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि एडीबी सर्वेक्षण में आलियाबाद की भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में होने की बात सामने आई है. इसलिए केंद्र सरकार की अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और प्रस्ताव वन मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर भेजा गया है. मंत्री हसन मुश्रीफ ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी मिल जाती है तो प्रस्तावित भूमि में बदलाव नहीं किया जाएगा. हालांकि, यदि वन भूमि उपलब्ध नहीं हो पाती, तो विधायक संजय खोडके द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक स्थलों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. इस मुद्दे ने अमरावती में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के निर्णय और राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं.

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