Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
भारत में विलुप्ति की राह पर बढ रहे गिध्दों ने फिर पकडी उडान

भारत में विलुप्ति की राह पर बढ रहे गिध्दों ने फिर पकडी उडान

मुंबई /दि.1- विषैली पशु चिकित्सक दवाओं के कारण लगभग दो दशक पहले भारत में गिध्दों की आबादी बेहद कम हो गई थी. वे आसमान से लगभग लुप्त हो गये थे. अब 700 से अधिक गिध्दों के कैद में प्रजनन और चरणबध्द पुनर्वास कार्यक्रमों की बदौलत उनकी वापसी हो रही है.

देश के संरक्षित बाघ अभयारण्य उनके लिए नए सुरक्षित ठिकाने बना रहे हैं. बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) और विभिन्न राज्य सरकारों के नेतृत्व में जारी अत्यंत संकटग्रस्त सफेद पीठ वाले और लंबी एवं पतली चोंच वाले गिध्दों की पुनर्बहाली परियोजना अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है. बीएनएचएस के निदेशक किशोर रिठे ने बताया कि हरियाणा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम में गिध्दों को प्रायोगिक रूप से जंगल में छोडा जा रहा है. जीपीएस और जीएसएम ट्रांसमीटरों के माध्यम से की जा रही निगरानी से उत्साहजनक परिणाम मिले हैं. उदाहरण के लिए पेंच बाघ अभयारण्य से छोडा गया लंबी चोंच वाला एक गिध्द केवल 17 दिन में 750 किलोमीटर की यात्रा कर महाराष्ट्र के नाशिक पहुंच गया.

* संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी हो सुरक्षित वातावरण
रिठे ने कहा कि इस परियोजना की दीर्घकालिक सफलता पर इस बात पर निर्भर करेगी कि संरक्षित क्षेत्रों से बाहर भी गिध्दों के लिए भोजन के सुरक्षित स्त्रोत उपलब्ध हो. उन्होंने कहा, गिध्दों के प्रजनन और पुनर्स्थापन कार्यक्रम की सफलता तभी संभव है जब संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी उनके के लिए सुरक्षित वातावरण बनाया जाए.
शोध के बाद हानिकारक दवाओं पर लगाई थी रोक: बीएनएचएस ने 1999 में भारतीय उपमहाद्बीप में गिध्दों की आबादी में भारी गिरावट का दस्तावेजीकरण किया था. बाद में शोध मेंं यह साबित हुआ कि डाइक्लोफेनाक नामक पशु चिकित्सा में प्रयुक्त गैर - स्टेरॉयडल सृजनरोधी दवा (एनएसआईडी) गिध्दों की सामूहिक मौत का मुख्य कारण थी. इस खोज के बाद 2006 में इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इसके बाद केटोप्रोफेन एसेक्लोफेनाक और निमेसुलाइड जैसी अन्य हानिकारक दवाओं पर भी रोक लगाई गई.
* नेपाल और भूटान तक फैल चुके है गिध्द
वर्ष 2020 में हरियाणा में छोडे गये सफेद पीठ वाले गिध्द अब जंगल ें प्राकृतिक रूप से प्रजनन करने लगे है. इस बीच पश्चिम बंगाल से छोडे गये 31 गिध्द सुरक्षित रूप से भारत, नेपाल और भूटान तक फैल चुके है. इनमें से किसी भी गिध्द की मृत्यु हानिकारक एनएसएआईडी दवाओं के कारण नहीं हुई. महाराष्ट्र गिध्दों की पुनर्बहाली का एक प्रमुख केन्द्र बनकर उभरा है. यहां पेंच, ताडोबा- अंधारी और मेलघाट बाघ अभयारण्यों में गिध्दोंको छोडा जा रहा है.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Mandal News