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एसटी बसों के भीतर और बाहर अनाधिकृत व भ्रामक विज्ञापन, स्टिकर चिपकानेवालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

एसटी बसों के भीतर और बाहर अनाधिकृत व भ्रामक विज्ञापन, स्टिकर चिपकानेवालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

कोला/दि.1-महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) ने अपनी पहचान 'लालपरी' के विद्रुपीकरण पर कडा रुख अपनाया है. बसों के भीतर और बाहर अनाधिकृत व भ्रामक विज्ञापनों के स्टिकर्स चिपकानेवालों के खिलाफ अब सीधे कानूनी कार्रवाई होगी.

प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि, ऐसे कृत्य 'सार्वजनिक संपत्ति के विद्रुपीकरण' के दायरे में आते है और दोषियों पर पुलिस केस दर्ज किया जाएगा.
दरअसल हाल के महिनों में एसटी बसों की खिडकियों, सीटों के पीछे, अंदरुनी दीवारों और बाहरी हिस्सों पर अवैध स्टिकर्स और पर्चों की भरमार देखी जा रही है. इनमें 'भोंदूबाबा', 'वशिकरण', 'जादू-टोना' और 'जल्दी अमीर बनने' जैसे झूठें दावे वाले विज्ञापन प्रमुख है. ये न केवल यात्रियों को गुमराह करते है, बल्कि बसों की साफ-सफाई और सौंदर्य को भी नुकसान पहुंचाते है. निगम के नियमों के मुताबिक, बस के किसी भी हिस्से पर विज्ञापन लगाने के लिए पूर्व अनुमति और निर्धारित शुल्क अनिवार्य है. बिना अनुमति लगाए गए पोस्टर सीधे तौर पर गैरकानूनी माने जाएंगे. प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि, ऐसे भ्रामक विज्ञापनों के झांसे में न आए. यदि कोई व्यक्ति बस में स्टिकर्स चिपकाते दिखे, तो तुरंत कंडक्टर या नजदिकी बसस्थानक अधिकारी को सूचना दें.

* राजस्व का भी नुकसान
- एसटी महामंडल अधिकृत विज्ञापनों से राजस्व कमाता है. लेकिन चोरी-छिपे लगाए जा रहे इन पोस्टरों से लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है. उपर से घटिया गोंद के कारण स्टिकर हटाने में बसों का रंग उखड जाता है और कांच पर अस्थायी दाग पडते है. इससे रखरखाव का भी खर्च बढ रहा है.
- विभाग नियंत्रक स्मीता सुतवणे ने स्पष्ट किया है कि, भोंदू बाबाओं को बढावा देनेवाले और बसों को बदसूरत बनाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.

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