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ईडब्ल्यूएस प्लॉटों की रजिस्ट्री पर लगाई जाए रोक

ईडब्ल्यूएस प्लॉटों की रजिस्ट्री पर लगाई जाए रोक

* नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाने की मांगअमरावती/दि.6- अमरावती जिले में स्वीकृत लेआउट के 6 मीटर एवं 7.5 मीटर चौड़ी सड़कों पर स्थित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्लॉटों की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) नहीं होने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है.

प्रभावित प्लॉटधारकों और विकासकों के प्रतिनिधियों ने अमरावती विधानसभा क्षेत्र की विधायक सुलभा खोडके को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और दुय्यम निबंधक कार्यालय द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की है. ज्ञापन में बताया गया है कि 5 मई 2026 से अमरावती के दुय्यम निबंधक कार्यालय ने स्वीकृत लेआउट के 6 मीटर और 7.5 मीटर चौड़ी सड़कों पर स्थित प्लॉटों की रजिस्ट्री करना बंद कर दिया है. इससे सैकड़ों प्लॉटधारक, खरीदार और विकासक आर्थिक एवं कानूनी संकट में फंस गए हैं.
* यूडीसीपीआर नियमों की गलत व्याख्या का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि महाराष्ट्र की यूनिफाइड डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेग्युलेशन-2020 की धारा 3.2.2 के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 100 वर्गमीटर तक के प्लॉटों हेतु 4.5 मीटर तथा 100 मीटर तक की लंबाई वाले 6 मीटर चौड़े मार्ग की अनुमति दी गई है. प्रतिनिधियों का आरोप है कि इस प्रावधान की गलत व्याख्या केवल अमरावती जिले में की जा रही है, जबकि महाराष्ट्र के अन्य सभी जिलों में ऐसे प्लॉटों की रजिस्ट्री बिना किसी बाधा के जारी है.
* प्रधानमंत्री आवास योजना की भावना को पहुंच रहा नुकसान
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना और राज्य सरकार की आवास नीति का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को कम लागत में भूखंड उपलब्ध कराना है. लेकिन अमरावती में रजिस्ट्री पर रोक से इस उद्देश्य को ही झटका लग रहा है. ज्ञापन में एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि मेडिकल इमरजेंसी के कारण एक व्यक्ति अपना प्लॉट बेचकर इलाज के लिए राशि जुटाना चाहता था, लेकिन रजिस्ट्री नहीं होने से उसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा. ऐसे अनेक नागरिक अपनी संपत्ति का वैधानिक हस्तांतरण नहीं कर पा रहे हैं.
* 99 प्रतिशत आबादी को बताया ईडब्ल्यूएस वर्ग में
ज्ञापन में आयकर आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि अमरावती जिले की लगभग 99 प्रतिशत आबादी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी में आती है. ऐसे में केवल कुछ तकनीकी कारणों से प्लॉटों की खरीद-बिक्री रोकना सामाजिक रूप से भी अनुचित बताया गया है.
* 'आरक्षण नहीं, केवल अनुमति' का तर्क
प्रतिनिधियों का कहना है कि 'यूडीसीपीआर' में केवल 'प्रपोज्ड फॉर ईडब्ल्यूएस' तथा 'मे बी परमिटेड' जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है. कहीं भी इन प्लॉटों को 'रिजर्वड फॉर ईडब्ल्यूएस' घोषित नहीं किया गया है. इसलिए इन प्लॉटों की बिक्री या रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता.
* विकासकों पर भी पड़ रहा असर
ज्ञापन के अनुसार विकासक अपने खर्च पर सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, बिजली पोल और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करते हैं. यदि ऐसे प्लॉटों की बिक्री पर रोक रहेगी तो भविष्य में विकासक 6 और 7.5 मीटर सड़क वाले लेआउट विकसित करने से बचेंगे तथा केवल 9 मीटर सड़क वाले महंगे लेआउट बनाएंगे, जिससे गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए प्लॉट खरीदना और कठिन हो जाएगा.
* ब्लैकमेलिंग की शिकायत भी उठाई
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इस विवाद का फायदा उठाकर कुछ लोग सूचना के अधिकार (आरटीआय) का उपयोग कर प्लॉटधारकों, विकासकों और सरकारी अधिकारियों को ब्लैकमेल कर अवैध वसूली करने का प्रयास कर रहे हैं. इससे आम नागरिकों में भय का वातावरण बन रहा है.
* विधायक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
ज्ञापन के माध्यम से विधायक सुलभा खोडके से मांग की गई है कि वे इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर अमरावती के दुय्यम निबंधक कार्यालय द्वारा 6 एवं 7.5 मीटर सड़क वाले स्वीकृत एथड प्लॉटों की रजिस्ट्री पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल हटवाएं, ताकि आम नागरिकों, प्लॉटधारकों और विकासकों को राहत मिल सके. ज्ञापन पर कैलास गिरोलकर, योगेश सवई, मनीष पनपालिया, मयूर जिरापुरे, रामू श्रीवास, बंडू दाबाने, किशोर भुयार, मनिष खोंडे, रवी वानखडे, महेश चाटे, नितीन बावणे, गजू बरवट, मनिष खुने, अमित गिरोलकर, राहुल गिरोलकर, कुंदन पखाले, मोईन भाई, शक्ति टिळके, गौरव माने, सुधाकर मोहोड, सुनिल कोपरे, छोटू मामा, बाबाराव वानखडे, दीपक गिरोलकर, राम राठोड, बंडू ठाकरे, अंकुश झोटिंग, शुभम खताले, दिनेश गडलिंग, हरिद दलवानी व बंटी चक्रे तथा अन्य अनेक नागरिकों के हस्ताक्षर हैं.

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