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क्या 'बर्थडे केक' बन रहा है स्लो पॉइजन?

क्या 'बर्थडे केक' बन रहा है स्लो पॉइजन?

* बिना लाइसेंस चल रहे केक निर्माण केंद्रों पर सवाल * एफडीए की कार्रवाई का इंतजार, विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं को किया सतर्क
अमरावती/दि. 2- जन्मदिन, शादी की सालगिरह, पारिवारिक समारोह या कोई भी छोटा-बड़ा उत्सव-केक आज हर खुशी का अहम हिस्सा बन चुका है.

लेकिन क्या यह आकर्षक और स्वादिष्ट दिखने वाला केक धीरे-धीरे लोगों की सेहत के लिए जहर साबित हो रहा है? शहर में तेजी से बढ़ रहे होम बेकर्स, बिना पंजीकरण वाले केक निर्माण केंद्रों और सस्ते दामों में बिक रहे रंग-बिरंगे केकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में बिक रहे कई केकों में सस्ते पाम ऑयल, कृत्रिम रंगों, रासायनिक तत्वों और कम गुणवत्ता वाली क्रीम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. ऐसे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से इस पूरे कारोबार की जांच करने की मांग उठने लगी है.
* गली-गली में केक निर्माण, लेकिन निगरानी नहीं
शहर में आज सैकड़ों छोटे-बड़े होम बेकर्स सोशल मीडिया के माध्यम से केक बेच रहे हैं. दो सौ रुपये से शुरू होने वाले आकर्षक केक घर-घर पहुंचाए जा रहे हैं. हालांकि इनमें से कई इकाइयों के पास खाद्य सुरक्षा से संबंधित आवश्यक लाइसेंस या पंजीकरण नहीं होने की आशंका जताई जा रही है. खाद्य सुरक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि इतने कम दामों में बिकने वाले केकों में गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों का कितना पालन किया जा रहा है, यह जांच का विषय है. सोशल मीडिया पर भी ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें केक में इस्तेमाल होने वाली क्रीम और रंगों की वास्तविकता उजागर करने का दावा किया गया है.
* आकर्षक रंगों के पीछे छिपा खतरा
केक को अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए कृत्रिम खाद्य रंगों का उपयोग किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन रंगों का उपयोग निर्धारित मानकों से अधिक मात्रा में किया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. विशेष रूप से लाल और गहरे गुलाबी रंग के केकों में उपयोग किए जाने वाले कुछ सिंथेटिक रंगों को लेकर समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं. वहीं पीले और नारंगी रंगों के अत्यधिक उपयोग को बच्चों में व्यवहारिक और एलर्जी संबंधी समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि किसी भी रंग को सीधे तौर पर कैंसर या अन्य गंभीर बीमारी का कारण बताने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण और नियामक जांच आवश्यक होती है, लेकिन विशेषज्ञ अत्यधिक रंगयुक्त खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह देते हैं.
* व्हिपिंग क्रीम या रसायनों का मिश्रण?
केक की सबसे आकर्षक परत उसकी मुलायम क्रीम होती है. लेकिन खाद्य उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उपयोग होने वाली अधिकांश व्यावसायिक व्हिपिंग क्रीम पूरी तरह दूध आधारित नहीं होती. इनमें वनस्पति वसा, इमल्सीफायर और अन्य खाद्य योजकों का उपयोग किया जाता है ताकि क्रीम लंबे समय तक स्थिर बनी रहे और जल्दी पिघले नहीं. कम गुणवत्ता वाली सामग्री या अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार की गई क्रीम पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकती है. इसके अलावा यदि क्रीम को उचित तापमान पर संग्रहित नहीं किया जाए तो उसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा भी बढ़ जाता है.
* सस्ते पाम ऑयल का बढ़ता उपयोग
जानकारों के अनुसार कम लागत में अधिक उत्पादन के लिए कई निर्माता मक्खन की जगह रिफाइंड पाम ऑयल या वनस्पति वसा का उपयोग करते हैं. पाम ऑयल खाद्य उद्योग में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और यह स्वयं अवैध नहीं है, लेकिन अत्यधिक मात्रा में संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) वाले खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ा सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार अत्यधिक वसा, चीनी और प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) खाद्य पदार्थों का सेवन मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकता है.
* एफडीए से जांच की मांग
खाद्य सुरक्षा से जुड़े लोगों ने एफडीए से मांग की है कि बाजार में बिक रहे केकों के नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाए. केकों में इस्तेमाल रंगों और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जाए. बिना लाइसेंस या पंजीकरण संचालित खाद्य व्यवसायों पर कार्रवाई की जाए. केक और क्रीम के भंडारण, स्वच्छता और तापमान मानकों की नियमित जांच की जाए. उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाए.
* उपभोक्ता कैसे रहें सतर्क?
विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे अत्यधिक चमकीले और अनैसर्गिक रंगों वाले केक खरीदने से बचें. केवल लाइसेंस प्राप्त और विश्वसनीय बेकरी या विक्रेता से ही केक खरीदें. पैकेजिंग पर सामग्री और निर्माण तिथि की जानकारी देखें. लंबे समय तक खुले में रखे गए केक और क्रीम वाले उत्पादों से बचें. बच्चों को अत्यधिक रंगयुक्त और अत्यधिक मीठे उत्पाद सीमित मात्रा में ही दें.
* बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
उल्लेखनीय है कि, केक अब केवल मिठाई नहीं, बल्कि आधुनिक उत्सव संस्कृति का हिस्सा बन चुका है. ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना सरकार, उत्पादकों और उपभोक्ताओं तीनों की जिम्मेदारी है. यदि गुणवत्ता और निगरानी पर ध्यान नहीं दिया गया तो उत्सव की मिठास स्वास्थ्य के लिए खतरा भी बन सकती है. इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि केक उद्योग में पारदर्शिता, नियमित जांच और उपभोक्ता जागरूकता समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है.

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