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क्या पीडब्ल्यूडी के विद्युत विभाग पर गिरेगी गाज?

क्या पीडब्ल्यूडी के विद्युत विभाग पर गिरेगी गाज?

* तीन मुख्य मुद्दों पर जांच समिति की बारीक नजर * 24 अगस्त को दुर्घटना में तीन शिशुओं ने गंवाई थी जान
अमरावती/दि.1 -जिला स्त्री अस्पताल अर्थात डफरीन में पिछले सोमवार 24 अगस्त को हुए भयंकर अग्निकांड की जांच कर रही स्वास्थ्य मंत्री द्वारा नियुक्त विशेष कमिटी की अहवाल का सभी को इंतजार है.

इस बीच सूत्रों की माने तो दो-तीन दिनों का समय समिति अपने निष्कर्षों के लिए और लेनेवाली है. उधर समस्त अमरावती जिला में बेसब्री से उस गोपनीय अहवाल का इंतजार हो रहा है, जिसमें कौनसे विभाग और अफसरान अथवा ठेकेदार पर अंगुली निर्देश कमिटी करती हैं? यह बात सामने आएगी. घटना के 9 दिनों बाद भी हादसे में मृत तीनों नवजात के परिजनों के अलावा आज भी अमरावती के अधिकांश लोग संजीदा है.
उल्लेखनीय है कि, विगत 24 अगस्त को तडके 3 बजे के दौरान जिला स्त्री अस्पताल डफरीन के तीसरे माले पर स्थित एनआईसीयू अर्थात नवजात शिशु अति दक्षता कक्ष में वेंटिलेटर विस्फोट से कोहराम मचा. तीन नवजात काल कलवित हो गए. 30 से अधिक नवजात को परिचारिकाओं और चिकित्सकों ने लगभग जान पर खेलकर बचाया. आनन-फानन में पीडीएमएमसी और अन्य अस्पतालों में भर्ती कर उनके प्राणों की रक्षा की गई. घटना से राज्यव्यापी क्षोभ देखा गया. शोक और क्षोभ के बीच प्रदेश शासन के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर आनन-फानन में अमरावती पहुंचे और यहां के चिकित्सकों, अधिकारियों को निर्देश दिए.
स्वास्थ्य मंत्री ने तत्काल जांच समिति गठित करते हुए सप्ताहभर के भीतर अपना अहवाल पेश करने के निर्देश दिए थे. 7 सदस्यीय समिति ने अगले ही दिन से जांच-पडताल प्रारंभ कर दी. ऐसे में समिति की रिपोर्ट के समय पर आ जाने की सभी को आशा थी. सोमवार को 8 दिन पूर्ण हो गए. पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले भी यहां आकर गए. उन्होंने गत शाम मीडिया से बातचीत में दावा किया कि, मंगलवार को जांच समिति की रिपोर्ट आ सकती है.
ऐसे में आज पूरे दिन समिति के रिपोर्ट की चर्चा सर्वत्र सुनने मिली, तथा यह भी टटोला गया कि, किन निष्कर्षों पर समिति की जांच केंद्रित रहनेवाली है. नाना प्रकार की संभावनाएं सोची गई. जबकि अमरावती मंडल को मिली सूत्रों की जानकारी के अनुसार अहवाल तैयार होने में दो-तीन दिनों का समय और लग सकता है. जांच समिति अपने निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है. समस्त राज्य में चर्चित हुए डफरीन हादसे में गोपनीय अहवाल सामने आनेवाला है.
सूत्रों ने अमरावती मंडल से चर्चा में दावा किया कि, दो-तीन मुद्दों पर मुख्य रुप से समिति ने गौर किया है. जिसमें पहला विषय शिशुओं को इन्क्युबेटर में रखा गया था? क्या यह इन्क्युबेटर ठीकठाक काम कर रहे थे अथवा यह मशीने खराब थी? दूसरा विषय जांच समिति के सामने उपरोक्त एनआईसीयू कक्ष का रहा. यह करीब एक हजार वर्ग फीट का कक्ष उस दिन की दुर्घटना पश्चात कालाकुट्ट हो गया था. वहां जांच समिति सदस्यों के पहुंचने पर भी उन्होंने देखा कि, तीन मशीने जलकर राख हो गई थी. ऐसे में समिति ने टटोलने का प्रयत्न किया कि, विस्फोट और आगजनी का कारण शॉर्ट-सर्कीट तो नहीं है?
तीसरा और महत्वपूर्ण विषय यह भी जांच समिति ने देखा है कि, डफरीन और विशेषकर एनआईसीयू का फायर ऑडिट हो गया था? अगर शॉर्ट-सर्कीट हुआ है, तो समस्त डफरीन अस्पताल की इलेक्ट्रीकसिटी फिटिंग का विषय है. यह व्यवस्था पीडब्ल्यूडी अर्थात लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है. पीडब्ल्यूडी का विद्युत विभाग ऐसी जिम्मेदारी का काम टेंडर जारी कर देता है.
सूत्रों पर यकीन करें, तो जब यह टेंडर दिया गया, तो 100 करोड का अमूमन रहा. जिसमें 40-50 करोड का डफरीन की इमारत का सिविल वर्क शामिल रहने की जानकारी देते हुए दावा किया गया कि, इलेक्ट्रीसिटी फिटिंग का एकमुश्त टेंडर जारी किया गया था. जिसमें अस्पताल के साथ-साथ सभी विभागों की वायरिंग, जनरेटर, एसी, सेंट्रल कुलिंग, सीसीटीवी कैमरा, फायर अलार्म, ऑटोमेटिक फायर सेफ्टी आदि सभी कामों का समावेश रहा था. ऐसे में अब जांच समिति की रिपोर्ट की प्रतीक्षा हो रही है, तो यह प्रश्न भी जानकार आपस में पूछ रहे है कि, क्या पीडब्ल्यूडी के विद्युत विभाग के अधिकारी लपेटे में आनेवाले है?

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