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मिलावटखोरों पर तुकाराम मुंढे का सबसे बड़ा प्रहार

मिलावटखोरों पर तुकाराम मुंढे का सबसे बड़ा प्रहार

* कानून के उल्लंघन पर आजीवन कारावास व लाइसेंस रद्द करने की चेतावनीमुंबई/दि.4- महाराष्ट्र में अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने खाद्य सुरक्षा को लेकर अब तक की सबसे व्यापक और कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया है.

राज्यभर में शुरू की गई 'सेव फूड, सेव ड्रग' मुहिम के तहत दूध एवं दुग्धजन्य पदार्थों की संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला, होटल-रेस्टोरेंट, शीतपेय तथा तथाकथित एनर्जी ड्रिंक कंपनियों के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं. मुंढे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि लाइसेंस रद्द करने से लेकर आपराधिक मुकदमे तक दर्ज किए जाएंगे, जिसमें आजीवन कारावास तक सजा का प्रावधान भी होगा.
पत्रकार परिषद में तुकाराम मुंढे ने कहा कि महाराष्ट्र के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना ही विभाग का मिशन है. दूध जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थ में होने वाली भेसळ सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है, इसलिए अब पूरी व्यवस्था को फार्म टू प्लेट मॉडल के तहत जवाबदेह बनाया जा रहा है.
* दूध कारोबार के लिए 25 सूत्रीय सख्त नियमावली
एफडीए ने दूध संग्रहण, शीतकरण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया के लिए 25 बिंदुओं वाली नई नियमावली जारी की है. इसके तहत दूध में पानी, यूरिया, डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा, स्टार्च, ग्लूकोज, मेलामाइन जैसे रसायनों की मिलावट पर शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाएगी. नियमों के अनुसार दूध संग्रहण केंद्र, कूलिंग सेंटर, थोक एवं खुदरा विक्रेता, डेयरी संचालक, पनीर, खवा, मक्खन, क्रीम, चीज और आइसक्रीम उत्पादक सभी को खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा. तापमान नियंत्रण, कोल्ड चेन व्यवस्था, खाद्य गुणवत्ता परीक्षण, ट्रेसेबिलिटी, बैच रिकॉर्ड और वैज्ञानिक लेबलिंग अब अनिवार्य कर दी गई है. मुंढे ने बताया कि कच्चे दूध (रॉ मिल्क) की बिक्री पूरी तरह बंद नहीं की गई है, लेकिन उस पर स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि यह कच्चा दूध है और उपयोग से पहले इसे उबालना आवश्यक है. वहीं सीलबंद पैकेजिंग को बढ़ावा देते हुए उन्होंने नागरिकों से अपील की कि बिना सीलबंद दूध खरीदने से बचें.
* मिलावट करने वालों को हो सकती है आजीवन कारावास की सजा
एफडीए आयुक्त मुंढे ने कहा कि दूध में मिलावट केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. ऐसे मामलों में संबंधित कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी और गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कार्रवाई केवल अंतिम विक्रेता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी आपूर्ति श्रृंखला में जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा.
* एनर्जी ड्रिंक कंपनियों को नोटिस, 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द लिखने पर रोक
पत्रकार परिषद में तुकाराम मुंढे ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि बाजार में बिकने वाले कई तथाकथित एनर्जी ड्रिंक उत्पादों को उनके लेबल पर एनर्जी ड्रिंक शब्द लिखने की अनुमति नहीं है. एफडीए ने इस संबंध में स्टिंग, रेड बुल और पेप्सिको सहित कई कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार यदि कोई उत्पाद निर्धारित श्रेणी में नहीं आता तो उसे एनर्जी ड्रिंक के रूप में प्रचारित नहीं किया जा सकता. ऐसे उत्पादों पर भ्रामक दावे पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही झूठे विज्ञापन करने वाली कंपनियों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
* स्कूलों के आसपास खाद्य पेय पदार्थों की बिक्री पर भी सख्ती
मुंढे ने संकेत दिए कि जल्द ही स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास बिकने वाले खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के संबंध में अलग से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर दायरे में क्या बेचा जा सकता है और क्या नहीं, इस पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. उन्होंने स्कूलों के मुख्याध्यापकों से भी अपील की कि यदि उनके परिसर के आसपास प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों की बिक्री हो रही हो तो इसकी सूचना एफडीए को दें.
* होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को कड़ी चेतावनी
होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायियों को चेतावनी देते हुए मुंढे ने कहा कि कई प्रतिष्ठान केवल कागजी प्रमाणपत्र दिखाकर पेस्ट कंट्रोल होने का दावा करते हैं, जबकि वास्तविकता में परिसर में कीट नियंत्रण नहीं किया जाता. ऐसे मामलों में केवल निलंबन नहीं, बल्कि लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि होटल, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में चुहें, मच्छर, मक्खी या अन्य कीटों के प्रति शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाएगी. पेस्ट कंट्रोल केवल सरकार से पंजीकृत एजेंसियों से ही कराया जा सकेगा और उसका वैध अनुबंध होना आवश्यक होगा.
* 'सेव फूड, सेव ड्रग' अभियान से बदलेगी खाद्य सुरक्षा की तस्वीर
तुकाराम मुंढे ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में आधुनिक खाद्य सुरक्षा संस्कृति विकसित करना है. इसके लिए वैज्ञानिक परीक्षण, जोखिम आधारित निरीक्षण, प्रशिक्षित पर्यवेक्षक, वार्षिक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, शिकायत निवारण प्रणाली और आधुनिक ट्रेसेबिलिटी तंत्र को लागू किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि महाराष्ट्र के नागरिकों तक शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंचें तथा खाद्य व्यवसाय में ईमानदारी और जवाबदेही की संस्कृति विकसित हो. खाद्य सुरक्षा से समझौता करने वालों के खिलाफ अब किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी.

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