* मूलत: बिहार से रखते हैं वास्ता, बिना कोचिंग व सेल्फ स्टडी के भरोसे बने आईएएसअमरावती /दि.3-गत रोज राज्य सरकार द्वारा राज्य के 25 आईएएस अधिकारियों का तबदला किया गया. जिनमें सांगली-मीरज-कुपवाड महानगर पालिका के आयुक्त सत्यम गांधी का भी समावेश है.
जिन्हें अमरावती जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर भेजा जा रहा है. इसके साथ ही अमरावती जिले को एक ऐसा आईएएस अधिकारी मिलने जा रहा है, जिसके संघर्ष और आईएएस अधिकारी बनने की कहानी बेहद रोचक होने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए काफी हद तक प्रेरणादायी भी कही जा सकती है.
बता दें कि, मूलत: बिहार के समस्तीपुर से वास्ता रखनेवाले सत्यम गांधी ने वर्ष 2020 में यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी तथा अप्रैल 2021 में उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनीत करते हुए महाराष्ट्र कैडर दिया गया था. हालांकि विकास से कोसों दूर रहनेवाले बिहार के ग्रामीण अंचलों के परिवेश को सुधारने हेतु सत्यम गांधी उस समय अपने लिए बिहार कैडर ही चाहते थे. खास बात यह है कि, सत्यम गांधी ने बिना किसी कोचिंग और पूरी तरह सेल्फ स्टडी के भरोसे पहली ही कोशिश में यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पार कर लिया था. साथ ही साथ देशभर में ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की थी.
अमरावती जिला परिषद के नवनियुक्त सीईओ सत्यम गांधी की कहानी को केवल संघर्ष की नहीं, बल्कि संयम और संकल्प की जीत की कहानी भी कहा जा सकता है. क्योंकि बिहार के समस्तीपुर जैसे विकास व सुविधाओं के मामले में पिछडेइलाके से वास्ता रखनेवाले आईएएस अधिकारी सत्यम गांधी की सफलता एवं उपलब्धियों का सफर उस भारत की सच्ची तस्वीर है, जहां साधन सीमित हैं, लेकिन सपने असीमित. गांव की सादगी में पले-बढ़े सत्यम के लिए दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि परीक्षा थी. न मोमोज खाने का शौक और न ही सैंडविच जैसे शहरी खानपान की ओर ध्यान और न आराम की तलाश. पता चला है कि, सत्यम गांधी के दादा जी की यह इच्छा थी कि उनके परिवार में कोई आईएएस बने. ऐसे में दादाजी की यह इच्छा सत्यम के लिए केवल एक इच्छा या आदेश नहीं रहे, बल्कि उन्होंने इसे जिम्मेदारी के तौर पर लिया. जिसके बाद उनकी जिंदगी का केंद्र सिर्फ पढ़ाई और एक लक्ष्य प्राप्त करना बन गया था. दिल्ली में राजेंद्र नगर के छोटे से कमरे में दिन के लंबे घंटे, खुद से बनाए नोट्स और बार-बार की गई रिवीजन. यही उनकी असली तैयारी थी. न शोर, न प्रचार, बस अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर की गई पढाई-लिखाई के बूते वर्ष 2020 में सत्यम गांधी ने न केवल यूपीएससी की परीक्षा को उत्तीर्ण की, बल्कि अपने इस पहले ही प्रयास में राष्ट्रीय स्तर पर दसवां स्थान भी हासिल किया. उनकी यह उपलब्धि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत कहा जा सकता है, क्योंकि उन्होंने बिना किसी महंगी कोचिंग के और स्व-अध्ययन के दम पर यह मुकाम पाया. आईएएस अधिकारी सत्यम की कहानी में एक खास बात यह है कि उन्होंने दिल्ली में रहने के दौरान मोमोज या सैंडविच जैसी चीजें तब तक नहीं देखीं जब तक उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई का मौका नहीं मिला था.
* परिवार पृष्ठभूमि और शुरुआती शिक्षा
अमरावती जिला परिषद के नवनियुक्त सीईओ सत्यम गांधी का जन्म एक साधारण ग्रामीण परिवार में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, पूसा, समस्तीपुर में हासिल की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दयालसिंह कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में बीए ऑनर्स किया. उनके पिता तकनीकी सहायक हैं और मां गृहिणी हैं. उनके परिवार का समर्थन सफर में हमेशा बना रहा. दादा जी की उस इच्छा ने सत्यम के अंदर एक स्पष्ट लक्ष्य पैदा किया कि वे यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने गांव का नाम रोशन करेंगे. इसी लक्ष्य ने उन्हें पढ़ाई के कठिन दिनों में भी निरंतर प्रेरित किया.
* सादगी, सेल्फ स्टडी और संकल्प और रणनीति
पता चला है कि, सत्यम गांधी ने यूपीएससी की तैयारी ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में ही शुरू कर दी. वे दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके में रहकर पढ़ाई करते थे, जो सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है. उन्होंने कभी भी प्री-लिम्स या मेन्स के लिए किसी कोचिंग संस्थान से खुद को नहीं जोड़ा था, बल्कि उन्होंने रोजाना 12 से 13 घंटे तक पढ़ाई करते हुए स्व-अध्ययन यानि सेल्फ स्टडी को अपनी रणनीति का मुख्य हिस्सा बनाया था. उन्होंने सामान्य अध्ययन के मानक ग्रंथों के साथ खुद के नोट्स तैयार किए और करीब 120 से अधिक मॉक टेस्ट देकर अपनी कमजोरियों को पहचाना और सुधारा. सत्यम ने पॉलिटिकल साइंस को अपना वैकल्पिक विषय इसलिए चुना क्योंकि यह उनकी पढ़ाई का विषय भी था और उनमें इस विषय में स्वाभाविक रुचि थी.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सत्यम गांधी के लिए प्री-लिम्स को समझना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन लय और अनुशासन के साथ तैयारी करने से यह भी पार हो गया. सत्यम गांधी ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2020 में कुल 1028 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक 10 पाई. उस वर्ष के टॉपर शुभम कुमार ने 1054 अंक पाए थे. जिसे देखते हुए उस परीक्षा में सत्यम की रैंक 10 आई, जो पहली कोशिश में बहुत बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है. सत्यम गांधी की इस कहानी से स्पष्ट संदेश मिलता है कि शिक्षा, दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन इंसान को असंभव को संभव बना देता है. आज सत्यम गांधी एक आईएएस अधिकारी हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान उनका पद नहीं, बल्कि उनका रास्ता है. सत्यम की सफलता यह भरोसा देती है कि गांव से निकलकर भी देश की सबसे कठिन परीक्षा जीती जा सकती है. दादा जी का सपना और खुद पर अटूट विश्वास यही सत्यम गांधी की कहानी है और यही इसकी सबसे बड़ी सीख भी. आज सत्यम स्वयं पर विश्वास करने वाले युवाओं के लिए मिसाल हैं. ऐसे में यह अमरावती जिले के लिए वाकई गर्व वाली बात है कि, अमरावती जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर प्रेरणादायक पृष्ठभूमि रहनेवाले आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की गई है.

