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पोहे में कीड़े और चावल में मिला कॉकरोच

पोहे में कीड़े और चावल में मिला कॉकरोच

* छात्रों की शिकायत पर एफडीए की बड़ी कार्रवाई * तुकाराम मुंढे के विभाग ने तुरंत लिया एक्शन
छत्रपति संभाजीनगर/दि.4 - छत्रपति संभाजीनगर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रावास की कैंटीन में छात्रों को परोसे जा रहे भोजन में कीड़े और कॉकरोच मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है.

कैंटीन में परोसे गए पोहे में कीड़े तथा चावल में कॉकरोच मिलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने तत्काल जांच शुरू की. जांच में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित कैंटीन का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.
जानकारी के अनुसार यह मामला छत्रपति संभाजीनगर स्थित पीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रावास की कैंटीन का है. छात्रों ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया था, जिसमें पोहे में कीड़े और चावल में कॉकरोच दिखाई देने का दावा किया गया. इसके बाद छात्रों ने अन्न एवं औषध प्रशासन के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एफडीए ने 'सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत विशेष जांच दल भेजा. अन्न सुरक्षा अधिकारी वर्षा रोडे और कीर्तिका झाडे के नेतृत्व में गठित टीम ने कैंटीन का विस्तृत निरीक्षण किया. जांच के दौरान कैंटीन परिसर में भारी गंदगी और खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन पाए गए.
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि छात्रों के भोजन में उपयोग किए जा रहे मसाले और इडली रवा की बड़ी मात्रा एक्सपायरी अवधि पार कर चुकी थी. अधिकारियों ने मौके पर ही इस सामग्री को जब्त कर नष्ट कर दिया. इसके अलावा खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य रंगों के उपयोग के भी प्रमाण मिले.एफडीए अधिकारियों के अनुसार कैंटीन संचालक द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के कई प्रावधानों का उल्लंघन किया गया था. छात्रों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली इन गंभीर लापरवाहियों को देखते हुए कैंटीन का लाइसेंस तत्काल निलंबित कर दिया गया है. विभाग ने संचालक के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है.
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में राज्यभर में चलाए जा रहे 'सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत खाद्य प्रतिष्ठानों की लगातार जांच की जा रही है. विभाग का कहना है कि छात्रों और नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी. इस घटना के बाद कॉलेज परिसर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है. छात्रों ने मांग की है कि कैंटीन की नियमित जांच की जाए और भविष्य में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए.
* अंबरनाथ में मिनरल वॉटर कंपनियों पर भी उठे सवाल
इधर दूसरी ओर अंबरनाथ औद्योगिक क्षेत्र में मिनरल वॉटर और शीतपेय बनाने वाली कुछ कंपनियों द्वारा टैंकर से पानी लेने का मामला भी चर्चा में है. सामने आए वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया है कि कुछ कंपनियां एमआईडीसी के अधिकृत जलस्रोत के बजाय बाहरी टैंकरों से पानी प्राप्त कर रही हैं.
एमआईडीसी अधिकारियों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों को नियमित जल आपूर्ति के लिए अधिकृत कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और बाहरी स्रोतों से पानी लेने की अनुमति नहीं है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि टैंकर का पानी उपयोग किया जा रहा है तो उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है और क्या इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव पड़ सकता है. स्थानीय नागरिकों ने एफडीए और एमआईडीसी प्रशासन से इस मामले की भी उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित कंपनियों के खिलाफ प्रशासन क्या कदम उठाता है.

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