किसी फिल्ममेकर के लिए राजनीतिक आवाज होना कितना मायने रखता है, इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'मैं पॉलिटिकल वॉइस के बारे में नहीं जानती, लेकिन इतना जरूर कह सकती हूं कि किसी भी फिल्ममेकर की अपनी आवाज होना जरूरी है.'
स्पीच हटाए जाने पर बोली लक्ष्मीप्रिया
बाफ्टा के चैनल से उनकी स्पीच हटाए जाने के बाद दुबारा अपलोड करने पर उन्होंने कहा, 'ऐसा सिर्फ मेरी स्पीच के साथ नहीं हुआ. दूसरों के साथ भी हुआ ह. 'आई स्वेयर' के मेकर के साथ भी ऐसा हुआ था. पहले स्पीच हटाई गई और फिर अपलोड कर दी गई. मुझे उस बात का ज्यादा अफसोस नहीं हुआ. मुझे कई लोगों के मैसेज आए, मगर मेरे लिए बाफ्टा का अनुभव अविश्वसनीय था. मैं उस खूबसूरत पल को खराब नहीं करना चाहती थी. मैंने उस पल का पूरा आनंद लिया.'
भेदभाव करना है गलत
इस प्रेस कांफ्रेंस में लक्ष्मीप्रिया देवी ने बताया कि रीमा दास की फिल्मों ने कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लिया और अवार्ड भी जीते हैं. साथ ही, उन्होंने 1981 की मणिपुरी फिल्म 'इमागी निंगथेम' और 1990 की 'इशानौ' का उल्लेख किया, जो विश्व प्रसिद्ध कान्स फिल्म फेस्टिवल सहित कई बड़े मंचों पर दिखाई जा चुकी हैं. ये फिल्में लक्ष्मीप्रिया की मौसी एम के बिनोदिनी देवी के द्वारा लिखी गई थीं.
उन्होंने आगे बताया, "नॉर्थ-ईस्ट भारत से कई फिल्में इंटरनेशनल लेवल पर सामने आई हैं, लेकिन नॉर्थ-ईस्ट में हर कोई खुद को नॉर्थईस्टर्न कहलाना पसंद नहीं करता, वो भी हम जैसे ही भारतीय है, नॉर्थ-ईस्ट शब्द और भेदभाव करना गलत है." दरअसल, फिल्म 'बूंग' मणिपुर की पृष्ठभूमि पर बेस्ड है, लेकिन लक्ष्मीप्रिया ने इसे मणिपुरी पहचान को बढ़ावा देने के लिए नहीं बनाया. ये कहानी उनके बचपन के अनुभवों और पारिवारिक कहानियों से प्रेरित है.
एक्सेल एंटरटेनमेंट का किया धन्यवाद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्देशक ने भावुक होते हुए कहा, "अगर एक्सेल साथ नहीं होता, तो 'बूंग' कभी रिलीज ही नहीं हो पाती." निर्देशक ने रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर द्वारा स्थापित बैनर एक्सेल एंटरटेनमेंट से मिले अटूट समर्थन को फिल्म की सफलता का एक बड़ा आधार बताया.
क्या 'बूंग' का दूसरा पार्ट बनेगा?
क्या वह 'बूंग' का पार्ट टू बनाने की योजना बना रही हैं? इस पर लक्ष्मीप्रिया मुस्कराते हुए कहती हैं, 'फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है. लेकिन यूरोप के एक चिल्ड्रंस फिल्म फेस्टिवल में कई बच्चों ने स्क्रीनिंग के बाद 'बूंग पार्ट 2' बनाने की मांग की थी.' भविष्य की फिल्मों के बारे में पूछने पर लक्ष्मी ने कहा कि अभी वह किसी नई फिल्म की योजना नहीं बना रही हैं. उनका कहना है कि अगर उन्हें कोई ऐसी कहानी मिलती है जो दिल को छू जाए, तभी वह नई फिल्म बनाना चाहेंगी. अगर ऐसी कहानी नहीं मिली तो वह फिल्मों के प्रोडक्शन या शेड्यूलिंग जैसे काम करने में भी खुश रहेंगी.