ताजा खबर: पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म 'पंजाब 95' आखिरकार नए नाम 'सतलज' के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है. यह फिल्म लंबे समय तक सेंसर बोर्ड के साथ विवादों में फंसी रही और थिएटर रिलीज नहीं हो सकी.
अब फिल्म के रिलीज होते ही एक बार फिर जसवंत सिंह खालरा का नाम चर्चा में आ गया है. फिल्म उनकी जिंदगी, संघर्ष और मानवाधिकारों के लिए लड़ी गई लड़ाई पर आधारित है.
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कौन थे जसवंत सिंह खालरा?
जसवंत सिंह खालरा पंजाब के अमृतसर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में डायरेक्टर थे. इसके साथ ही वह एक सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ता भी थे. 1990 के दशक में जब पंजाब आतंकवाद और हिंसा के दौर से गुजर रहा था, तब उन्होंने कथित फर्जी एनकाउंटर और लापता लोगों के मामलों की जांच शुरू की.बताया जाता है कि अपने एक साथी के लापता होने के बाद उन्होंने श्मशान घाटों के रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए. जांच के दौरान उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों का अंतिम संस्कार "लावारिस" बताकर किया गया था, जिनकी पहचान कभी सार्वजनिक नहीं की गई.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा विवाद
जसवंत सिंह खालरा ने 1995 में एक प्रेस नोट जारी कर आरोप लगाया कि 1984 से 1994 के बीच हजारों लोगों के साथ अन्याय हुआ और कई शवों का अंतिम संस्कार बिना उचित पहचान के कर दिया गया. उनके इन दावों ने पूरे देश में हलचल मचा दी और मानवाधिकार संगठनों का ध्यान इस मुद्दे की ओर गया.
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अपहरण और मौत
सितंबर 1995 में जसवंत सिंह खालरा का कथित रूप से अपहरण कर लिया गया. बाद में उनका कोई पता नहीं चला. इस मामले में कई चश्मदीद गवाह सामने आए, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस अपने साथ ले गई थी.बाद में इस मामले की सीबीआई जांच हुई. जांच के आधार पर अदालत ने माना कि खालरा का अपहरण और हत्या की गई थी. इस मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया और उन्हें सजा सुनाई गई. यह मामला भारत के चर्चित मानवाधिकार मामलों में गिना जाता है.
'सतलज' क्यों रही विवादों में?
दिलजीत दोसांझ अभिनीत इस फिल्म का मूल नाम 'पंजाब 95' था. फिल्म में उस दौर की संवेदनशील घटनाओं को दिखाया गया है. इसी कारण सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कई बदलाव और कट लगाने की बात कही थी. लंबे समय तक मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म रिलीज नहीं हो सकी.अब फिल्म 'सतलज' नाम से बिना किसी कट के ओटीटी पर रिलीज की गई है. फिल्म के रिलीज होने के बाद दिलजीत दोसांझ ने भी खुशी जाहिर की और कहा कि वह लंबे समय से इसके दर्शकों तक पहुंचने का इंतजार कर रहे थे.
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क्यों खास है यह फिल्म?
'सतलज' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने मानवाधिकारों के मुद्दे पर आवाज उठाई. फिल्म उस दौर की घटनाओं और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के संघर्ष को सिनेमाई रूप में पेश करने का प्रयास करती है.फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अभिनय की भी काफी चर्चा हो रही है. उनके अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं.
FAQ
1. 'सतलज' फिल्म किस पर आधारित है?
सतलज मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है.
2. जसवंत सिंह खालरा कौन थे?
जसवंत सिंह खालरा पंजाब के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे. उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में कथित फर्जी एनकाउंटर और लापता लोगों के मामलों को उजागर करने का काम किया था.
3. फिल्म 'पंजाब 95' का नाम बदलकर 'सतलज' क्यों रखा गया?
फिल्म को सेंसर बोर्ड से जुड़े विवादों के बाद नए नाम 'सतलज' के साथ रिलीज किया गया. पहले इसका टाइटल 'पंजाब 95' था.
4. दिलजीत दोसांझ ने फिल्म में किसका किरदार निभाया है?
दिलजीत दोसांझ ने फिल्म में जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभाई है.
5. 'सतलज' रिलीज से पहले विवादों में क्यों रही?
फिल्म संवेदनशील विषय पर आधारित होने के कारण सेंसर बोर्ड के साथ लंबे समय तक विवाद में रही. रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म में कई बदलाव और कट लगाने की मांग की गई थी, जिसके चलते इसकी रिलीज में देरी हुई.
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