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महानायक Amitabh Bachchan के वो यादगार Diwali उत्सव

महानायक Amitabh Bachchan के वो यादगार Diwali उत्सव

Amitabh Bachchan Diwali Celebration: जब बात सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की हो, तो उनके जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात उनके फैंस के दिलों के करीब होती है. दिवाली का पावन पर्व, उज्ज्वल प्रकाश, और अपनों के साथ खुशियां मनाने का प्रतीक है.

वक्त के साथ देश और दुनिया में बहुत कुछ बदल गया है, और इसी के साथ अमिताभ बच्चन के बचपन की दिवाली और आज की दिवाली के तौर-तरीकों में भी एक बदलाव आया है.(Amitabh Bachchan Childhood Diwali Memories)

आइए जानते हैं कि कैसे अमिताभ बच्चन ने अपने शुरुआती दिनों में इलाहाबाद (प्रयागराज) की गलियों में दिवाली मनाई थी और आज मुंबई के भव्य माहौल में उनका यह त्योहार कैसा होता है.(Amitabh Bachchan Diwali in Allahabad)

इलाहाबाद के दिनों की वह दिवाली:

अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में हुआ था. उनका बचपन वहीं बीता, और उस दौर की दिवाली आज की चकाचौंध से बिल्कुल अलग हुआ करती थी. जब मायापुरी के दिवाली अंकों के लिए मैं सालों पहले उनसे उनके फिल्मों की शूटिंग सेट पर मिलती थी, तब दिवाली त्यौहार की बात उठने पर उनके चेहरे पर आनंद उल्लास के भाव उभरते देखना सचमुच सुकून देने वाला था. उन्होंने कई सुंदर दिवाली की बातें साझा की थी.(Amitabh Bachchan Prayagraj Diwali Memories)

पिता का सानिध्य और कविताएं:

उनके पिता, महान कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन, साहित्य से जुड़ी एक खास शख्सियत होने से अमिताभ के बचपन की दिवाली पार्टियों(मेल मुलाकातों) में बड़े बड़े कवि, साहित्यकारों का जमघट हुआ करता था. बच्चों की बात अलग थी, लेकिन बड़ों की दीपावली में शोशा से ज्यादा संस्कारों, परिवार के साथ बैठने और आपसी प्यार पर जोर होता था.

दिवाली के पर्व पर हरिवंश राय बच्चन और अन्य कवियों की कविताओं से माहौल गमगामा उठता था, घर की बनी मिठाइयांऔर पारिवारिक मेल-जोल से दीवाली जीवंत हो उठता था.

वो मिट्टी के दीये और असाधारण रोशनी: उन दिनों आज की तरह बिजली की फैंसी लड़ियों और भारी लाइटिंग का दौर नहीं था. दिवाली की आहट पाते ही घरके बच्चे उल्लास के साथ काम पर लग जाते थे. घर के स्टोर रूम से मिट्टी के दीए निकालना, उनकी सफाई करना , पानी में भिगो कर रखना, माता जी से रूई की बत्तियां बनाना सीखना, और माता पिता के साथ दिवाली कपड़ों की खरीदारी करने बाजार जाना, सब में वो आनंद छिपा होता था, जो आज के रेडिमेड दीपों, इलेक्ट्रिक लड़ियों या शो वाले बैटरी दीयों या खूबसूरत परिधानों में कभी नहीं मिल सकता.

बचपन में अमिताभ अपने भाई और माता पिता के साथ मिलकर घर के आंगन और बरामदे में मिट्टी के दीये खुद सजाते थे. उन दीयों की दिपदिपाती सुनहरी रोशनी में एक अलग ही चमक और सुकून होता था.

मिठाइयों की महक और पटाखे: उस दौर में घर पर ही मां तेजी बच्चन के मार्गदर्शन में मिठाइयां बनती थीं. तरह तरह की मिठाईयां. और रात में लक्ष्मी पूजन होने के बाद नाते, रिश्ते दोस्त, पड़ोसियों को थाली में सजाकर यही मिठाईयां, साथ में, पारंपरिक खील, बताशे,लाई, लावा,सब होता था. आज वो माहौल कहां?

पटाखों के जबरदस्त मुकाबले:

उन दिनों बम, लड़ियों, फुलझड़ियाँ, अनार, फव्वारों, सुतली बम का बड़ा चलन था. जो पॉकेट मनी मिलता, उससे बच्चे यही सब खरीद लाते थे. बच्चों के लिए सबसे बड़ा रोमांच यही हुआ करता था कि पड़ोस के बच्चों ने पटाखा फोड़ते हुए जितना जोर का धमाका किया, उससे बड़ा धमाका हम करेंगे.

इस वजह से माता पिता से डांट भी खाना पड़ता था. बड़े लोग समझाते कि बड़े-बड़े और शोर मचाने वाले पटाखों के बजाय रोशनी और उल्लास पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए.

वक्त का पहिया और मुंबई में त्योहार की नई परिभाषा:

आज से कुछ साल पहले तक अमिताभ बच्चन के बंगले में दिवाली का जश्न धूमधाम से मनाया जाता था. पूरी फिल्म इंडस्ट्री के छोटे बड़े सभी इस दिवाली पार्टी में शरीक होते, देर रात तक आनंद उत्सव मनाया जाता था. जया बच्चन जी खुद अपनी निगरानी में सैंकड़ों तरह के पकवान, मिष्ठान्न, बनवाती और मेहमानों, रिश्तेदारों को परोसती थी, जिन्हे कार्ड खेलना पसंद था, उनके लिए कार्ड का अलग कॉर्नर होता था. खूब जमघट होती थी.

वक्त के साथ अब अलग तरह से मनती है दिवाली:

आज मुंबई के प्रतीक्षा, जलसा और जनक जैसे बंगलों में दिवाली का जश्न एक बड़े पारिवारिक अनुष्ठान की तरह मनाया जाता है.

परिवार का साथ और बच्चों की किलकारियां: आज अमिताभ बच्चन के लिए दिवाली का मतलब सिर्फ एक त्योहार ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार का एक छत के नीचे इकट्ठा होना है. जया बच्चन, बेटी श्वेता , उनका परिवार, बेटा अभिषेक, उनका परिवार, सबके साथ यह त्योहार बेहद निजी और खुशनुमा माहौल में मनाया जाता है.

भव्य सजावट लेकिन पारंपरिक जड़ें:

जहां एक तरफ मुंबई के बंगलों में आधुनिक लाइटिंग और भव्य सजावट होती है, वहीं अमिताभ बच्चन अपनी पुरानी परंपराओं को नहीं भूलते. आज भी घर में पारंपरिक तरीके से पूजा की जाती है और वे खुद अपने हाथों से भगवान को दीया अर्पित करते हैं.
घर, आंगन, बगीचे में मिट्टीके दीए ही प्रज्ज्वलित किया जाता है. पर्यावरण की सुरक्षा के मद्देनजर अब धमाके वाले पटाखों के बदले सगुन की फुलझड़ियां और अनार की खूबसूरती से दीवाली मनाई जाती है.

फैंस के साथ जुड़ाव: कभी अमिताभ बच्चन अपने घर के बाहर आकर हजारों फैंस के साथ दिवाली की खुशियां बांटते थे. हालांकि अब वह परंपरा थोड़ी सीमित हुई है, लेकिन आज भी सोशल मीडिया के जरिए वे अपने चाहने वालों को दिवाली की शुभकामनाएं देना कभी नहीं भूलते.

अमिताभ बच्चन के बचपन की दिवाली जहाँ इलाहाबाद की मिट्टी की सोंधी खुशबू और सादगी से जुड़ी थी, वहीं आज की दिवाली आधुनिकता और परिवार की छांव में सिमटी हुई है. लेकिन इन दोनों दौर में अगर कुछ नहीं बदला, तो वह है अपनों के प्रति प्यार और त्योहार का असली आनंद.

FAQs

1. अमिताभ बच्चन बचपन में दिवाली कहां और कैसे मनाते थे?

Where and How Did Amitabh Bachchan Celebrate Diwali During His Childhood?

अमिताभ बच्चन बचपन में इलाहाबाद (प्रयागराज) में अपने माता-पिता और भाई के साथ दिवाली मनाते थे. उस समय परिवार मिलकर मिट्टी के दीये साफ करता, उनमें रूई की बत्तियां लगाता और घर के आंगन व बरामदे को दीयों से सजाता था.

2. अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन के घर दिवाली कैसे मनाई जाती थी?

How Was Diwali Celebrated at Harivansh Rai Bachchan's Home?

हरिवंश राय बच्चन के घर दिवाली का त्योहार साहित्यिक और पारिवारिक माहौल में मनाया जाता था. इस मौके पर कई बड़े कवि और साहित्यकार इकट्ठा होते थे. कविताओं, घर की बनी मिठाइयों और पारिवारिक मेल-जोल से त्योहार की रौनक बढ़ जाती थी.

3. अमिताभ बच्चन के बचपन में दिवाली पर कौन-कौन सी मिठाइयां और पकवान बनते थे?

What Sweets and Traditional Food Were Prepared During Amitabh Bachchan's Childhood Diwali?

अमिताभ बच्चन के बचपन में उनकी मां तेजी बच्चन के मार्गदर्शन में घर पर कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती थीं. लक्ष्मी पूजन के बाद रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को मिठाइयों के साथ खील, बताशे, लाई और लावा बांटे जाते थे.

4. अमिताभ बच्चन आज मुंबई में अपने परिवार के साथ दिवाली कैसे मनाते हैं?

How Does Amitabh Bachchan Celebrate Diwali With His Family in Mumbai Today?

आज अमिताभ बच्चन मुंबई में अपने परिवार के साथ दिवाली का त्योहार मनाते हैं. इस मौके पर जया बच्चन, अभिषेक बच्चन, श्वेता बच्चन और परिवार के अन्य सदस्य एक साथ खुशियां बांटते हैं. घर में पारंपरिक पूजा और दीये जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है.

5. अमिताभ बच्चन की बचपन और आज की दिवाली में क्या अंतर आया है?

What Is the Difference Between Amitabh Bachchan's Childhood Diwali and Today's Celebration?

अमिताभ बच्चन के बचपन की दिवाली सादगी, मिट्टी के दीयों, घर की मिठाइयों और पारिवारिक मेल-जोल से जुड़ी थी. वहीं आज मुंबई में दिवाली आधुनिक सजावट और पारिवारिक समारोहों के बीच मनाई जाती है. हालांकि, पूजा-पाठ, परंपराओं और अपनों के साथ खुशियां बांटने का महत्व आज भी बरकरार है.

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