ताजा खबर: भारतीय सिनेमा के इतिहास में बहुत कम ऐसे अभिनेता हुए हैं जिनका जीवन फिल्मों की कहानी से भी ज्यादा उतार-चढ़ाव भरा रहा हो. संजय दत्त उन्हीं सितारों में से एक हैं, जिनकी जिंदगी संघर्ष, सफलता, विवाद और वापसी का अद्भुत मिश्रण रही है.
उन्हें फैंस प्यार से 'संजू बाबा' कहते हैं.
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135 से अधिक फिल्मों में काम किया
चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 135 से अधिक फिल्मों में काम किया और अपने दमदार अभिनय, अलग अंदाज और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस से करोड़ों दर्शकों का दिल जीता. स्टार किड के तौर पर फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले संजय दत्त ने अपनी जिंदगी में ड्रग्स की लत, निजी दुख, कानूनी विवाद, जेल की सजा और गंभीर बीमारी जैसी चुनौतियों का सामना किया, लेकिन हर बार पहले से ज्यादा मजबूत होकर लौटे. यही वजह है कि आज भी उन्हें बॉलीवुड के सबसे प्रेरणादायक कलाकारों में गिना जाता है.
फ़ैमिली
29 जुलाई 1959 को मुंबई में जन्मे संजय दत्त, अभिनेता और राजनेता सुनील दत्त तथा दिग्गज अभिनेत्री नरगिस के बेटे हैं. उनका पूरा नाम संजय बलराज दत्त है. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई हिमाचल प्रदेश के द लॉरेंस स्कूल, सनावर से की और बाद में मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की. उनकी पहली फिल्म रिलीज होने से पहले ही उनकी मां नरगिस का कैंसर के कारण निधन हो गया, जिसने उनके जीवन पर गहरा असर डाला. यही वह दौर था, जब वह मानसिक रूप से टूट गए और धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में चले गए.
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बाल कलाकार के रूप में शुरू किया काम
संजय दत्त ने बाल कलाकार के रूप में 'रेशमा और शेरा' (1971) में काम किया था, लेकिन बतौर हीरो उनकी शुरुआत 1981 में रिलीज हुई फिल्म 'रॉकी' से हुई. इसके बाद 'विधाता', 'नाम', 'साजन', 'सड़क', 'खलनायक', 'गुमराह' और 'आतिश' जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड के बड़े सितारों की कतार में खड़ा कर दिया. खासकर 'खलनायक' में निभाया गया उनका 'बल्ली' का किरदार आज भी उनके सबसे यादगार रोल्स में गिना जाता है.

ड्रग्स की लत से जूझते रहे

हालांकि, सफलता के बीच उनकी निजी जिंदगी लगातार मुश्किलों से घिरी रही. उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि युवावस्था में लगभग नौ वर्षों तक वह ड्रग्स की लत से जूझते रहे. बाद में अमेरिका में इलाज और अपनी इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने इस लत को छोड़ा. इसके बाद फिटनेस और अनुशासित जीवनशैली को अपनाकर उन्होंने खुद को पूरी तरह बदल दिया.
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कानूनी विवादों में आया नाम
साल 1993 में मुंबई बम धमाकों के बाद संजय दत्त का नाम कानूनी विवादों में आया. उन पर अवैध हथियार रखने का आरोप लगा. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें बम धमाकों की साजिश के आरोपों से राहत मिली, लेकिन अवैध हथियार रखने के मामले में दोषी ठहराया गया और पांच साल की सजा सुनाई गई. उन्होंने अपनी सजा पूरी की और 25 फरवरी 2016 को जेल से रिहा हुए. इस पूरे दौर में उनकी जिंदगी लगातार सुर्खियों में रही.
पर्सनल लाइफ़
संजय दत्त की निजी जिंदगी भी काफी चर्चित रही. उन्होंने तीन शादियां कीं. पहली पत्नी ऋचा शर्मा का 1996 में कैंसर से निधन हो गया, जिनसे उनकी बेटी त्रिशाला दत्त हैं. इसके बाद उन्होंने रिया पिल्लई से शादी की, लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चला. वर्ष 2008 में उन्होंने मान्यता दत्तसे विवाह किया. आज दोनों जुड़वां बच्चों शाहरान और इकरा के माता-पिता हैं.
जेल के बाद की वापसी
जेल और विवादों के बाद भी संजय दत्त ने हार नहीं मानी. वर्ष 1999 में आई 'वास्तव: द रियलिटी' में उनके 'रघु' के किरदार ने उन्हें पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिलाया. इसके बाद 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'लगे रहो मुन्ना भाई' ने उनकी छवि पूरी तरह बदल दी. 'जादू की झप्पी' और 'गांधीगिरी' जैसे संवाद आज भी लोगों की जुबान पर हैं. इन फिल्मों ने उन्हें नई पीढ़ी का भी पसंदीदा अभिनेता बना दिया.


खलनायक रोल्स के लिए हुए फेमस

हाल के वर्षों में संजय दत्त ने पैन-इंडिया फिल्मों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई. 'केजीएफ: चैप्टर 2' में 'अधीरा', 'लियो' में 'एंटनी दास' और कई अन्य फिल्मों में उनके खलनायक अवतार को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके अलावा वह लगातार हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में सक्रिय हैं.
धुरंधर में रहा दमदार रोल
'धुरंधर' में संजय दत्त ने एस.पी. चौधरी आसलम (S.P. Choudhary Aslam) का किरदार निभाया है. यह किरदार वास्तविक जीवन के पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी चौधरी असलम खान से प्रेरित बताया जाता है, जिन्हें कराची में आतंकवादियों और गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता था.
फिल्म में उनका किरदार बेहद दमदार, निडर और बेखौफ पुलिस अधिकारी का है. एस.पी. चौधरी आसलम अपराधियों के खिलाफ किसी भी हद तक जाने वाला अधिकारी है, जिसकी पहचान उसके आक्रामक तेवर, दमदार संवाद और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस से होती है. फिल्म में उनके कई संवाद दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए.
हालांकि, 'धुरंधर' में संजय दत्त का स्क्रीन टाइम बहुत लंबा नहीं है, लेकिन उनका किरदार कहानी पर गहरा प्रभाव छोड़ता है. उनकी एंट्री और एक्शन सीक्वेंस फिल्म के हाईलाइट्स में गिने जाते हैं. फिल्म में उनका लुक, बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी दर्शकों को काफी पसंद आई.
एक्टर पर बन चुकी है बायोपिक
संजय दत्त की जिंदगी पर बनी बायोपिक 'संजू' (2018) भी सुपरहिट रही, जिसमें रणबीर कपूर ने उनका किरदार निभाया. यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही.
गाने
FAQ
1. संजय दत्त का जन्म कब और कहां हुआ था?
संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में हुआ था.
2. संजय दत्त के माता-पिता कौन हैं?
उनके पिता अभिनेता और राजनेता सुनील दत्त तथा मां दिग्गज अभिनेत्री नरगिस थीं.
3. संजय दत्त ने बॉलीवुड में डेब्यू किस फिल्म से किया था?
उन्होंने बतौर हीरो 'रॉकी' (1981) से बॉलीवुड में कदम रखा.
4. संजय दत्त की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में कौन-कौन सी शामिल हैं?
'नाम', 'साजन', 'सड़क', 'खलनायक', 'वास्तव', 'मुन्ना भाई एमबीबीएस', 'लगे रहो मुन्ना भाई', 'केजीएफ: चैप्टर 2' और 'लियो' उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं.
5. संजय दत्त को किस फिल्म के लिए पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला था?
उन्हें 'वास्तव: द रियलिटी' के लिए पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला.
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