DSGMC on Satluj: दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) स्टारर पॉलिटिकल ड्रामा 'सतलुज' (Satluj) को Zee5 से हटाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस फैसले का विरोध करते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) ने इसे मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की कहानी को लोगों से दूर रखने की कोशिश करार दिया है.
कमेटी ने घोषणा की है कि फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग कराई जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे देख सकें.
अब दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी दिखाएगी फिल्म (Delhi Sikh Gurudwara Management Committee on Satluj)
दरअसल, मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को DSGMC के प्रेसिडेंट हरमीत सिंह कालका ने कहा, 'क्योंकि दिलजीत दोसांझ की यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की बायोग्राफिकल कहानी है, इसलिए यह दिखाती है कि कैसे एक सोशल एक्टिविस्ट ने लोगों की आंखें सच्चाई से खोलीं. उन्होंने 25,000 ऐसी लाशों के सबूत खोजे जिन्हें 'लावारिस' बताकर जला दिया गया था और इस मुद्दे को न सिर्फ देश में बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी उठाया, जिससे पंजाब की खराब हालत सामने आई. इस कहानी को दबाना, उस बुरे दौर की घटनाओं को लोगों तक पहुंचने से रोकना बहुत गलत है, और इससे सिख कम्युनिटी में बहुत गुस्सा है'.
स्कूलों और कॉलेजों में आयोजित किए जाएंगे सेमिनार
हरमीत सिंह कालका ने आगे कहा, 'हमने सभी गुरुद्वारा कमेटी के सदस्यों से कहा है कि वे फिल्म को डाउनलोड करके अपने-अपने इलाकों में दिखाएं ताकि यह लोगों तक पहुंच सके. इसके अलावा, हम जल्द ही अपने स्कूलों और कॉलेजों के चेयरपर्सन के साथ एक मीटिंग करेंगे. जसवंत सिंह खालरा के जीवन और विरासत पर चर्चा करने के लिए हर कॉलेज में सेमिनार आयोजित किए जाएंगे. हम चाहते हैं कि लोग समझें कि एक अकेला सोशल एक्टिविस्ट समाज पर कितना असर डाल सकता है. अगर एक व्यक्ति इतना कुछ हासिल कर सकता है, तो कोई कारण नहीं है कि हम सब मिलकर ऐसा न कर सकें'.
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जसवंत सिंह खालरा की ज़िंदगी पर आधारित है 'सतलुज'
हनी त्रेहन की डायरेक्ट की हुई 'सतलुज' जसवंत सिंह खालरा की ज़िंदगी पर आधारित है, जिसने 1984 से 1994 तक पंजाब में हज़ारों अनजान लाशों के अंतिम संस्कार की जांच की थी. वह 1995 में गायब हो गया था. 2005 में, पंजाब पुलिस के चार लोगों को खालरा के किडनैप और मर्डर का दोषी ठहराया गया और सात साल जेल की सज़ा सुनाई गई. दो साल बाद, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी सज़ा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी.
5 जुलाई को ओटीटी से हटाई गई 'सतलुज'
'सतलुज' फिल्म तीन साल से ज़्यादा समय तक सेंसर बोर्ड के पास अटकी रही, जिससे मेकर्स को 3 जुलाई को नए टाइटल सतलुज के तहत ZEE5 पर इसका अनकट वर्जन रिलीज करना पड़ा. हालांकि, इसे दो दिन बाद 5 जुलाई को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. जब यह OTT पर आई, तो फिल्म को कई लोगों ने डाउनलोड किया और सर्कुलेट किया. इस वजह से, प्लेटफ़ॉर्म ने नेटिज़न्स से पायरेसी से बचने की अपील की.
Frequently Asked Questions (FAQ)
1. दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) ने विरोध क्यों जताया? (Why is the Delhi Sikh Gurudwara Management Committee (DSGMC) protesting?)
DSGMC ने Zee5 से सतलुज हटाए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे सामाजिक कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की कहानी को दबाने की कोशिश बताया है.
2. DSGMC ने फिल्म को लेकर क्या कहा? (What did DSGMC say about the film?)
कमेटी का कहना है कि फिल्म इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को सामने लाती है और इसे लोगों तक पहुंचना चाहिए.
3. DSGMC ने क्या ऐलान किया है? (What action has DSGMC announced?)
कमेटी ने सतलुज की पब्लिक स्क्रीनिंग आयोजित करने और जसवंत सिंह खालरा के जीवन एवं योगदान पर शैक्षणिक सेमिनार कराने की घोषणा की है.
4. पब्लिक स्क्रीनिंग कराने का उद्देश्य क्या है? (Why does DSGMC want to hold public screenings?)
DSGMC का कहना है कि फिल्म का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और सभी को इसे देखने का अवसर मिले.
5. जसवंत सिंह खालरा कौन थे? (Who was Jaswant Singh Khalra?)
जसवंत सिंह खालरा एक सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट थे, जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े मामलों को उजागर किया था.
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