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Shanti Priya का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: Mayapuri संग बातचीत में अपने सफर और कमबैक पर खुलकर बोलीं Shanti Priya

Shanti Priya का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: Mayapuri संग बातचीत में अपने सफर और कमबैक पर खुलकर बोलीं Shanti Priya

क्षय कुमार के साथ 'सौगंध' (Saugandh) से हिंदी फिल्म में डेब्यू करने वाली जानी-मानी एक्ट्रेस शांति प्रिया (Shanti Priya) ने अपने करियर में साउथ से लेकर बॉलीवुड तक एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है.

क्लासिकल डांसर से अभिनेत्री बनने तक का उनका सफर मेहनत, आत्मविश्वास और अपने दम पर आगे बढ़ने की मिसाल है. हाल ही में मायापुरी की पत्रकार 'शिल्पा नालम्वार ने उनसे बातचीत की. इस बातचीत में शांति प्रिया ने अपने शुरुआती दिनों, संघर्ष, परिवार के सपोर्ट, इंडस्ट्री के बदलते दौर और अपने कमबैक पर खुलकर बात की. पेश हैं इस खास इंटरव्यू के मुख्य अंश......

आप मनोरंजन जगत का एक जाना-माना नाम है, आपकी एक्टिंग की शुरुआत कैसे हुई?

मैं और मेरी बहन भानुप्रिया (Bhanupriya) हम दोनों बचपन से क्लासिकल डांसर रहे हैं और हमारा झुकाव हमेशा कला की तरफ रहा है. लेकिन एक्टिंग का फैसला अचानक नहीं था. जब मुझे मेरी पहली फिल्म 'एंगा ऊरु पट्टुकरन' (Enga Ooru Pattukaran) ऑफर हुई, तो उस फिल्म का किरदार इतना खास और अलग था कि मैं उसे छोड़ना नहीं चाहती थी. ऐसा बहुत कम होता है कि हजारों किरदारों में से कोई एक दिल को छू जाए. मैंने उसी समय तय कर लिया कि मुझे यह करना है. हालांकि मेरी मां तैयार नहीं थीं, लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि मैं सिर्फ एक फिल्म करूंगी, क्योंकि उस समय मेरी पढ़ाई भी चल रही थी. आखिरकार उन्होंने मुझे मौका दिया और वहीं से मेरे करियर की शुरुआत हुई. (Shanti Priya interview Bollywood comeback journey)

परिवार को मनाना आपके लिए कितना मुश्किल था?

परिवार का साथ हर किसी के लिए बहुत जरूरी होता है, खासकर जब आप एक अलग फील्ड में जाना चाहते हैं. मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं सिर्फ एक फिल्म करूंगी और अपने शब्द पर कायम रहूंगी. जब पहली फिल्म सफल हुई और मुझे लगातार ऑफर मिलने लगे, तो मां ने खुद महसूस किया कि मुझे रोकना सही नहीं होगा. धीरे-धीरे उनका पूरा सपोर्ट मिल गया, जो मेरे लिए बहुत बड़ी ताकत बना.

आपने कई भाषाओं में काम किया है , इस पर क्या कहना चाहेंगी?

मेरे लिए सबसे पहले मैं एक कलाकार हूं, उसके बाद भाषा आती है. मैंने तमिल, तेलुगु, हिंदी और कन्नड़—चार भाषाओं में काम किया है और मुझे इसमें कभी कोई परेशानी नहीं हुई. मैं मानती हूं कि भारत एक ऐसा देश है जहां अलग-अलग भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन हम सब एक हैं. अगर मुझे किसी और भाषा में भी काम करने का मौका मिले, तो मैं जरूर करूंगी. एक कलाकार के लिए भाषा कभी रुकावट नहीं होनी चाहिए. (Shanti Priya South to Bollywood career struggle success)

साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री में क्या फर्क महसूस हुआ?

सच कहूं तो मैंने कभी दोनों इंडस्ट्री के बीच कोई बड़ा अंतर महसूस नहीं किया. लोग अक्सर पूछते थे कि साउथ और बॉलीवुड में क्या फर्क है, लेकिन मेरे अनुभव में दोनों जगह प्रोफेशनलिज्म और अनुशासन बराबर था. जिन हिंदी फिल्मों में मैंने काम किया, उनके निर्माता और निर्देशक भी काफी अनुशासित थे—टाइमिंग, शेड्यूल और काम करने का तरीका बिल्कुल साउथ जैसा ही था. इसलिए मेरे लिए यह बदलाव बहुत सहज रहा.

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90 के दशक को आप कैसे देखती है, उस दौर के बारे में आप क्या कहेंगी?

90 का दौर सच में बहुत खास था और मैं उसे गोल्डन एरा मानती हूं. उस समय इतनी सुविधाएं नहीं थीं—न वैनिटी वैन, न बड़े सेटअप. हम सेट पर ही तैयार होते थे, कई बार खुले में या अस्थायी इंतजाम के साथ. डायलॉग्स भी उसी दिन मिलते थे और जल्दी-जल्दी सीन तैयार करके शूटिंग शुरू हो जाती थी. आज के समय में बहुत बदलाव आ गया है—स्क्रिप्ट पहले से मिलती है, वर्कशॉप होती हैं, तैयारी का समय मिलता है. यह एक अच्छा बदलाव है, लेकिन उस दौर की सादगी और मेहनत की बात ही अलग थी. (Shanti Priya latest interview Mayapuri Shilpa Nalamwar)

आपने अपने करियर के पीक पर ब्रेक क्यों लिया? वो भी तब जब आप बड़े- बड़े स्टार्स के साथ काम कर रही थी?

मैंने शादी के बाद खुद फैसला लिया कि मैं अपने परिवार को समय दूं. उस समय इंडस्ट्री में शादी के बाद महिलाओं के लिए रोल सीमित हो जाते थे और ज्यादातर किरदार मां, बहन या भाभी के होते थे. मैं वही काम करना चाहती थी जिसमें मुझे संतुष्टि मिले, इसलिए मैंने थोड़ा पीछे हटना सही समझा. यह मेरा व्यक्तिगत फैसला था और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है.

उस दौर में वैनिटी वैन और सुविधाओं को लेकर आपका क्या अनुभव रहा?

उस समय आज जैसी सुविधाएं बिल्कुल नहीं थी. वैनिटी वैन का तो नाम भी नहीं था. हम लोग सेट पर ही तैयार होते थे—कभी स्टूडियो के छोटे-छोटे कमरों में, और अगर आउटडोर शूट होता था तो वहीं किसी टेम्पो या गाड़ी में पर्दा लगाकर कपड़े बदलने पड़ते थे. कई बार तो सड़क किनारे ही इंतज़ाम करना पड़ता था, जहां साड़ी या चादर से घेरकर चेंज किया जाता था. (Shanti Priya early life struggles and family support)

आप हमेशा से चाहती थीं कि आपको अपने दम पर काम मिले, न कि अपनी बहन के नाम पर, इस बारे में क्या कहेंगी?

देखिए, यह बात मेरे लिए शुरू से बहुत साफ थी कि मैं जो भी हासिल करूं, वह मेरी अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर हो. मेरी बड़ी बहन भानुप्रिया पहले से ही इंडस्ट्री में एक स्थापित नाम थीं और एक शानदार अभिनेत्री हैं, लेकिन मैंने कभी यह नहीं चाहा कि लोग मुझे सिर्फ 'उनकी बहन' के तौर पर पहचानें. मैं हमेशा यही सोचती थी कि अगर मुझे कोई फिल्म मिले, तो वह इसलिए मिले क्योंकि निर्देशक और निर्माता को लगता है कि मैं उस किरदार के साथ न्याय कर सकती हूं, न कि इसलिए कि मेरा किसी से रिश्ता है. मेरी बहन भानुप्रिया हमेशा मेरी मेंटर रही हैं. उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया—चाहे वह मेकअप हो, कैमरे के सामने खुद को कैसे प्रेजेंट करना है या फिर इंडस्ट्री में खुद को कैसे संभालना है. लेकिन काम मुझे हमेशा मेरे टैलेंट के आधार पर ही मिला.

अब जब आप वापस इंडस्ट्री में एक्टिव हो गई हैं, तो आप अपने फैंस के लिए क्या कहना चाहेंगी?

सबसे पहले मैं अपने फैंस से कहना चाहती हूं कि उन्होंने मुझे हमेशा इतना प्यार दिया, उसके लिए मैं दिल से आभारी हूं. मैं जानती हूं कि मैंने लंबा ब्रेक लिया और शायद उन्हें मेरी कमी महसूस हुई होगी, इसके लिए मैं माफी भी मांगती हूं. लेकिन अब मैं वापस आ गई हूं और पूरी तरह से काम करने के लिए तैयार हूं. मैं चाहती हूं कि उन्हें अच्छा और मजबूत कंटेंट दूं, जिससे वे फिर से मुझसे जुड़ सकें.

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आपने अपने करियर मे मिथुन चक्रवर्ती (Mithun Chakraborty), सनी देओल (Sunny Deol), गोविंदा (Govinda) जैसे दिग्गजों के साथ काम किया है, उनके साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?

मिथुन जी उस समय बड़े सुपरस्टार थे, उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला. अक्षय कुमार बहुत मेहनती और अनुशासित हैं—तब भी थे और आज भी वही जुनून है. सनी देओल के साथ काम करना भी अच्छा अनुभव रहा. गोविंदा के साथ मैंने फिल्म नहीं की, लेकिन स्टेज शो किए हैं और वह शानदार डांसर हैं. हर कलाकार से मैंने कुछ न कुछ सीखा है. (Shanti Priya personal life and acting career balance)

'मायापुरी' ने अपने 50 साल पूरे कर लिए हैं, ऐसे में आपका इसके साथ रिश्ता कैसा रहा है?

'मायापुरी' के साथ मेरा रिश्ता बहुत खास रहा है. यह एक ऐसी पत्रिका है जिसने हमेशा मेरे काम को जगह दी और मेरे करियर के हर पड़ाव को दर्शाया. मेरी फिल्मों की यादें इसमें दर्ज हैं, जो मेरे लिए बहुत कीमती हैं. मैं 'मायापुरी' को दिल से धन्यवाद देती हूं और इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूं.

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