पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया है। दक्षिण 24 परगना के फलता विधानसभा क्षेत्र में हुई वोटिंग अब मान्य नहीं मानी जाएगी, यानि यहां फिर से चुनाव होगा।
आखिर फलता में ऐसा क्या हुआ कि आयोग को इतना सख्त कदम उठाना पड़ा, आइए जानते हैं।
29 अप्रैल की वोटिंग रद्द, 21 मई को फिर मतदान
शनिवार की देर रात चुनाव आयोग ने एक बड़ी घोषणा की। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर 29 अप्रैल को हुई पूरी वोटिंग प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है। आयोग ने आदेश दिया है कि अब यहां 21 मई को नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे। हैरानी की बात यह है कि जहां कल यानी सोमवार को बंगाल की बाकी 293 सीटों के नतीजे आएंगे, वहीं फलता सीट की गिनती को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। यहां के नतीजे अब 24 मई को सामने आएंगे।
वोट के दौरान कई गड़बड़ियां
चुनाव आयोग ने यह फैसला बिना किसी ठोस वजह के नहीं लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्देश पर विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने इलाके का दौरा कर पूरी स्थिति का जायजा लिया। रिपोर्ट में करीब 30 बूथों पर दोबारा मतदान की सिफारिश की गई। करीब 30 बूथों पर सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए, जिससे कंट्रोल रूम से निगरानी नामुमकिन हो गई थी। कुछ बूथों पर ईवीएम पर मौजूद पार्टी के चुनाव चिह्नों को टेप से ढक दिया गया था। जब तक यह टेप हटाया गया, तब तक 58% वोटिंग हो चुकी थी।
मतदान के बाद भी बवाल
वोटिंग के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया। हाशिमनगर में झड़पें हुईं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने मारपीट व वोटिंग में बाधा डालने के आरोप लगाए। दो दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए, सड़कें जाम की गईं और दोबारा चुनाव के साथ कुछ नेताओं की गिरफ्तारी की मांग उठी।
आयोग की सख्ती: एफआईआर और गिरफ्तारी के आदेश
आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान के करीबी साथियों, इसराफुल और सुजाद्दीन शेख के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। आयोग ने साफ कर दिया है कि डराने-धमकाने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।
कल मतगणना के लिए हाई अलर्ट, सुरक्षा का कड़ा पहरा
मतगणना से पहले चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां और भी तेज कर दी हैं ताकि पूरे प्रोसेस में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। खास तौर पर सोमवार को होने वाली काउंटिंग के लिए अतिरिक्त काउंटिंग ऑब्जर्वर और पुलिस ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं। पूरे राज्य में कुल 242 पर्यवेक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।
सभी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा को तीन-लेयर में बांटा गया है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति अंदर प्रवेश न कर सके। केंद्रीय बलों की करीब 200 कंपनियां तैनात हैं, और हर स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए कम से कम 24 जवान लगाए गए हैं। ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को स्ट्रांग रूम से काउंटिंग हॉल तक पूरी निगरानी में लाया जाएगा, जहां गिनती शुरू होने से पहले उनकी सील और टैग को ध्यान से चेक किया जाएगा।
दोपहर तक आ जाएंगे रुझान
एंट्री सिस्टम भी काफी सख्त रखा गया है, सिर्फ क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र के जरिए ही अंदर जाने की अनुमति होगी, जिसे कई लेवल पर स्कैन किया जाएगा। अंदर वही लोग जा पाएंगे जो अधिकृत हैं, जैसे रिटर्निंग ऑफिसर, काउंटिंग स्टाफ, ऑब्जर्वर, उम्मीदवार और उनके एजेंट।
मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे शुरू होगी, जिसमें सबसे पहले पोस्टल बैलेट गिने जाएंगे और उसके बाद ईवीएम वोटों की काउंटिंग होगी। दोपहर तक शुरुआती रुझान आने लगेंगे, लेकिन कुछ सीटों पर अंतिम नतीजों में थोड़ा वक्त लग सकता है, क्योंकि वहां गिनती के राउंड ज्यादा हो सकते हैं।

