नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था घरेलू मोर्चे पर मजबूत कंजम्पशन और वित्तीय तरलता (Liquidity) के सहारे लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन ग्लोबल मार्केट के दबाव और ग्रामीण मोर्चे पर कुछ सुस्ती के संकेत भी मिल रहे हैं।
ब्रोकरेज फर्म HDFC Securities द्वारा जारी जून 2026 की 'भारत बैरोमीटर' रिपोर्ट के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि देश में बैंकिंग क्रेडिट, UPI पेमेंट्स और म्यूचुअल फंड में निवेश का सेंटिमेंट बेहद शानदार बना हुआ है।
हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार चौथे महीने की गई भारी बिकवाली और ग्रामीण क्षेत्रों में देरी से पहुंचे मॉनसून के कारण जलाशयों के कम जलस्तर ने आर्थिक रफ्तार के सामने कुछ चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जहां जून में शहरी बेरोजगारी दर घटकर 7.20% पर आ गई है, वहीं थोक महंगाई दर (WPI) 10% के स्तर पर स्थिर बनी हुई है, जो नीति निर्माताओं के लिए एक बारीक संतुलन साधने का संकेत है।
एक्सटर्नल सेक्टर (स्कोर: 3/5*)
मई 2026 में सामान के एक्सपोर्ट में तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि सर्विस सेक्टर की ग्रोथ धीमी रही; वहीं सामान के इंपोर्ट में भारी उछाल आया और सर्विस इंपोर्ट में कमी आई। अप्रैल में FDI इनफ्लो में उछाल देखा गया, लेकिन FII आउटफ्लो बढ़ गया और लगातार चौथे महीने जारी रहा।
केंद्र सरकार का फाइनेंस (स्कोर: 3/5*)
मई 2026 में कैपिटल और रेवेन्यू खर्च की ग्रोथ में कमी आई, हालांकि कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ बढ़कर लो-डबल डिजिट में पहुंच गई। सब्सिडी भुगतान की ग्रोथ महीने-दर-महीने के आधार पर धीमी हुई, लेकिन इसी दौरान मजबूत बनी रही।
इंडस्ट्रियल एक्टिविटी (स्कोर: 4/5*)
जून 2026 में बिजली उत्पादन की ग्रोथ बढ़कर हाई-सिंगल डिजिट में पहुंच गई, जबकि कोयले की खपत में गिरावट रुक गई और ई-वे बिल जेनरेशन बढ़कर मिड-टीन (13-17% के बीच) में पहुंच गया। इसके उलट, स्टील की खपत की ग्रोथ घटकर हाई-सिंगल डिजिट लेवल पर आ गई और पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में गिरावट धीमी हो गई।
मांग और खपत (स्कोर: 3/5*)
मई में हवाई यात्रियों की संख्या में महीने-दर-महीने मजबूत ग्रोथ बनी रही, जबकि ऑटो रजिस्ट्रेशन की ग्रोथ धीमी हुई और अप्रैल में विदेशी पर्यटकों के आगमन में कमी आई। लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम की ग्रोथ में भारी गिरावट देखी गई, जबकि नॉन-लाइफ इंश्योरेंस की ग्रोथ स्थिर रही और पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री मजबूत बनी रही।
बैंकिंग और मनी फ्लो (स्कोर: 4/5*)
जून 2026 में मनी सप्लाई की ग्रोथ में उछाल आया और बैंक क्रेडिट ग्रोथ और बढ़ी, हालांकि डिपॉजिट ग्रोथ में थोड़ी कमी आई। UPI ट्रांजैक्शन की ग्रोथ धीमी हुई लेकिन मजबूत बनी रही, जबकि IMPS ट्रांजैक्शन में गिरावट जारी रही और फास्टैग कलेक्शन वॉल्यूम में और कमी आई।
ग्रामीण इंडिकेटर (स्कोर: 3/5*)
अप्रैल 2026 में फर्टिलाइजर की बिक्री की ग्रोथ और बढ़ी। ग्रामीण रोजगार की ग्रोथ में मामूली सुधार हुआ, जबकि मई में ट्रैक्टर और टू-व्हीलर दोनों की बिक्री की ग्रोथ धीमी हुई, हालांकि यह मजबूत बनी रही।
कैपिटल मार्केट (स्कोर: 3/5*)
जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड में नेट इनफ्लो महीने-दर-महीने बढ़ा और SIP योगदान में मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि नए SIP रजिस्ट्रेशन की संख्या लगभग स्थिर रही। हालांकि, जून के महीने में ट्रेडिंग वॉल्यूम की ग्रोथ और धीमी हो गई।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मिली-जुली तस्वीर
कुल मिलाकर, जून 2026 की 'भारत बैरोमीटर' रिपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था की एक मिली-जुली तस्वीर पेश करती है। एक तरफ जहां रिकॉर्ड म्यूचुअल फंड इनफ्लो, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और UPI ट्रांजैक्शन के दम पर घरेलू बाजार में जबरदस्त लिक्विडिटी और डिमांड दिख रही है, तो दूसरी तरफ लगातार बढ़ रहा FII आउटफ्लो, उच्च थोक महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी चिंता का विषय हैं। आगामी महीनों में आर्थिक स्थिरता और टिकाऊ ग्रोथ काफी हद तक मॉनसून की प्रगति और ग्रामीण मांग में सुधार पर निर्भर करेगी।

