Digital Arrest Scam India: दिल्ली की 77 साल की एक रिटायर्ड महिला 'डिजिटल अरेस्ट' का शिकार हो गई और ₹13 करोड़ से ज्यादा गंवा बैठीं। इस मामले में, धोखेबाज़ों ने WhatsApp वीडियो कॉल के ज़रिए पुलिस अधिकारी और जज बनकर महिला को ठग लिया।
महिला को डरा धमका कर धोखा दिया गया। पूरे देश में इस तरह के स्कैम बढ़ रहे हैं। आमतौर पर धोखेबाज मुख्य रूप से बुज़ुर्ग, आर्थिक रूप से संपन्न और कम जानकारी रखने वाले नागरिकों को निशाना बनाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, महिला जो एक रिटायर्ड डॉक्टर थीं, उन्हें WhatsApp पर एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले लोग पुलिस की वर्दी में थे और उन्होंने महिला पर मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने महिला को गिरफ्तारी की धमकी दी और खुद को असली पुलिस साबित करने के लिए एक नकली पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप भी दिखाया, जिसमें झंडे और सरकारी चिन्ह मौजूद थे।
महिला को अदालत में किया पेश
कुछ दिनों बाद महिला को एक वर्चुअल कोर्ट में पेश किया गया, जहां एक व्यक्ति जज बनकर बैठा था। उसने महिला को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी और कहा कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें सजा हो सकती है। ठगों ने महिला को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया, ताकि वह किसी और से बात न कर सके और पूरी तरह उनके कंट्रोल में रहे। ठगों ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल अरेस्ट बताया। उन्होंने कहा कि महिला की संपत्ति की जांच करनी है और इसके लिए पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने होंगे।
16 दिन में लूट लिए जिंदगी भर की कमाई
करीब 16 दिनों तक महिला लगातार उनके संपर्क में रही और उन्होंने कई बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर दिए। इस दौरान ठगों ने इतना दबाव बनाया कि महिला किसी परिवार वाले या पुलिस से संपर्क नहीं कर पाई। इस स्कैम में महिला ने लगभग 13 करोड़ रुपये (करीब 1.6 मिलियन डॉलर) ट्रांसफर कर दिए। जब अचानक ठगों का संपर्क बंद हुआ, तब महिला को शक हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
डिजिटल गिरफ़्तारी' गैर-कानूनी है - पूर्व जज
साइबर ठगी के मामलों कि सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि "डिजिटल अरेस्ट" नाम की कोई चीज भारतीय कानून में कहीं नहीं लिखी। दिल्ली के पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव जैन, साफ कहते हैं कि भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' का कोई प्रावधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक DK बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) फैसले के अनुसार किसी भी गिरफ्तारी के लिए उचित पहचान, दस्तावेज और कानूनी सलाह का अधिकार अनिवार्य है। फोन या वीडियो कॉल पर कोई भी गिरफ्तारी न तो संभव है, न कानूनी। ठग बस आपके डर और अधिकार के भ्रम का फायदा उठाते हैं।
इन संकेतों से समझ जाएं आपके साथ हो रही है ठगी
1. सबसे बड़ी खतरे की निशानी है अनजान वीडियो कॉल। अगर व्हाट्सएप या किसी भी ऐप पर वर्दीधारी अधिकारी या जज का कॉल आए तो तुरंत काट दें और स्वतंत्र रूप से नंबर वेरिफाई करें।
2. फोन पर तत्काल पैसे की मांग की जाए तो समझ लीजिए यह 100 फीसदी स्कैम है। क्योंकि कोई भी अधिकारी किसी नागरिक से ऑनलाइन, व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य माध्यम से तत्काल भुगतान करने का दबाव नहीं बनाता।
3. ठगों की सबसे बड़ी पहचान ये है कि वे परिवार से दूर रखते है। अगर कोई कहे किसी को मत बताना तो यह ठगी का सबसे बड़ा हथियार है, ऐसे में तुरंत अपने परिजन को बताएं।
4.ठग केस को असली दिखाने के लिए नकली वर्दी पहनकर और कोर्टरूम जैसा महौल बनाकर डराते हैं। मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाला थाना, झंडे, वर्दी और कोर्ट आसानी से बनाए जा सकते हैं, यह सब दिखावा है।
5. कोई भी बैंकिग अधिकारी या कर्मचारी आपके मोबाइल पर आने वाले OTP, CVV, ATM PIN या नेट बैंकिंग पासवर्ड कभी नहीं मांगता। अगर ठग आपसे ये मांगे तो समझ जाइए कि खतरा है। यह गोपनीय जानकारी किसी को न दें।
6. साइबर फ्रॉड आपको जल्दबाजी करने और डराने वाली भाषा में बात करेगा। ठग आपको जल्दी से बिना किसी कानूनी कार्रवाई के मामले को रफादफा करने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाएगा। इस तरह के संकेत साफ बताते है कि आप के साथ साइबर ठगी की जाएगी।

