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Duty Free Steel Export: भारत-UK डील का कमाल! लाखों टन स्टील पर खत्म हुआ टैक्स का बोझ

Duty Free Steel Export: भारत-UK डील का कमाल! लाखों टन स्टील पर खत्म हुआ टैक्स का बोझ

ई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (सीईटीए) बुधवार से लागू होने के साथ ही भारतीय निर्यातक अब हर साल 11 लाख टन से अधिक इस्पात का ब्रिटेन को शुल्क-मुक्त निर्यात कर सकेंगे।

ब्रिटेन द्वारा मार्च में लागू किए गए इस्पात सुरक्षा उपाय 24 जुलाई, 2025 को हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के क्रियान्वयन में प्रमुख अड़चन बन गए थे। इस मुद्दे के समाधान के बाद 15 जुलाई से समझौते को लागू करने का रास्ता साफ हो गया।

कुल मिलाकर, भारत से ब्रिटेन को निर्यात किए जाने वाले 13.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के 188 इस्पात उत्पादों को इन सुरक्षा उपायों के दायरे में लाया गया। वर्ष 2025 में भारत का कुल इस्पात निर्यात 96 करोड़ अमेरिकी डॉलर का था।

ब्रिटेन से कोटा बढ़ाने की मांग

अपने निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए भारत ने इन उपायों के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से ब्रिटेन के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की।हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के आधार पर भारत ने ब्रिटेन से इस्पात सुरक्षा उपायों के तहत भारत के लिए कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया। अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर लंबी और गहन बातचीत के बाद भारत अपने निर्यातकों के लिए मजबूत बाजार पहुंच और निरंतरता सुनिश्चित करने में सफल रहा।

शुल्क-मुक्त पहुंच का दायरा बढ़ा

उन्होंने कहा कि इन सफल वार्ताओं के परिणामस्वरूप नए ढांचे के तहत भारत का देश-विशिष्ट कोटा (सीएसक्यू) बढ़कर 1,68,029 टन हो गया है। इसके साथ ही अधिकृत उपयोग योजना (एयूएस) के तहत भारत के लिए विशेष रूप से उपलब्ध 9.45 लाख टन का कोटा भी मिलेगा। द्विपक्षीय व्यापार समझौते में संतुलन बनाए रखने और संभावित व्यापारिक प्रभाव को कम करने के लिए ब्रिटेन ने प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में शुल्क-मुक्त पहुंच का दायरा बढ़ाया है।

गैर-मिश्रधातु (नॉन-अलॉय) और अन्य मिश्रधातु के 'हॉट-रोल्ड शीट व स्ट्रिप' श्रेणी में भारत का देश-विशिष्ट कोटा लगभग तीन गुना बढ़ाकर 12,405 टन से 33,456 टन कर दिया गया है।भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए ब्रिटेन ने एयूएस के तहत उपलब्ध कोटे का 40 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से भारत के लिए आरक्षित किया है जिससे भारत के लिए करीब 9.45 लाख टन का विशेष व्यापारिक कोटा सुनिश्चित हुआ है।

भारत के इस्पात निर्यात को मिली बड़ी राहत

इसी तरह, श्रेणी-28 (गैर-मिश्रधातु तार) के तहत नौ 'कमोडिटी कोड' को इन सुरक्षा उपायों के दायरे से बाहर कर दिया गया है। इससे इस श्रेणी में भारत के 95 प्रतिशत निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। अधिकारी ने बताया कि भारत ने अन्य महत्वपूर्ण उप-श्रेणियों में भी बाजार पहुंच का विस्तार सुनिश्चित किया है। इसके तहत श्रेणी-12बी (गैर-मिश्रधातु मर्चेंट बार और लाइट सेक्शन) में 'रेसिड्यूल कोटा' 468 टन से बढ़ाकर 4,540 टन कर दिया गया है। वहीं, श्रेणी-26 (अन्य वेल्डेड ट्यूब) में 'रेसिड्यूल कोटा' 10,809 टन से बढ़ाकर 16,327 टन कर दिया गया है। विभिन्न देशों को उनके व्यापार के आधार पर इस्पात के लिए देश-विशिष्ट कोटा आवंटित किया जाता है। इस कोटे के बाद अतिरिक्त या बचा हुआ कोटा 'रेसिड्यूल कोटा' कहलाता है।

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