आयकर विभाग ने हाल ही में बैंकों से मिलने वाले ब्याज पर 'स्रोत पर कर कटौती' (TDS) लागू करने के संबंध में एक स्पष्टीकरण जारी किया है। लेकिन, शंकाओं को दूर करने के बजाय इससे और ज्यादा भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
अब कई निवेशक यह सोच रहे हैं कि कुछ ज्यादा TDS काटा जाएगा, और नए नियमों के तहत उनकी पसंदीदा फिक्स्ड-इनकम निवेश योजना फिक्स्ड डिपॉज़िट (FDs) पर किस तरह से टैक्स लागू होगा। ऐसे में नए इनकम टैक्स के नियमों को समझना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि TDS तभी कटता है जब आपका कुल ब्याज एक तय सीमा से ज्यादा हो जाता है। सामान्य निवेशकों के लिए यह सीमा 50,000 रुपये है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह 1 लाख रुपये रखी गई है। अगर आपका ब्याज इस सीमा से कम है, तो बैंक कोई TDS नहीं काटेगा।
जानिए नियम क्या कहता है?
इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 194A के प्रावधानों के तहत, प्रतिभूतियों पर मिलने वाले ब्याज के अलावा अन्य ब्याज पर स्रोत पर कर (TDS) काटा जाना ज़रूरी है। हालांकि, धारा 194A(3) के तहत, बैंकिंग कंपनियों को ऐसे ब्याज पर कर काटने की जरूरत नहीं होती। अगर यह निर्धारित सीमा (50,000 रुपये/1,00,000 रुपये, जैसा भी लागू हो) से ज्यादा न हो।
नए कानून में क्या बदलाव आया है?
नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत, ब्याज पर TDS को धारा 393(1) के अंतर्गत रखा गया है, जबकि "बैंकिंग कंपनी" की परिभाषा धारा 402 में दी गई है। अब उलझन यह है कि पहले के कानून में उन बैंकों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था जो बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 51 के अंतर्गत आते हैं। लेकिन नए अधिनियम में इसका कोई जिक्र नहीं है। बैंक और योग्य बैंकिंग संस्थान तय सीमा से कम ब्याज आय पर TDS नहीं काटेंगे। शामिल संस्थानों का दायरा असल में वैसा ही रहेगा, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। जमाकर्ताओं को नए कानून में परिभाषा में हुए बदलावों की वजह से ही कोई अतिरिक्त TDS नहीं देना पड़ेगा।
बैंक ब्याज पर TDS
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर 10% TDS काटा जाएगा। अगर खाताधारक अपना PAN नहीं देता है, तो यह दर बढ़कर 20% हो जाती है। वरिष्ठ नागरिकों की FD के ब्याज पर तब तक TDS नहीं काटा जाएगा, जब तक कि यह एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये से ज्यादा न हो। अन्य लोगों के लिए सामान्य सीमा 50,000 रुपये है। रिकरिंग डिपॉजिट (RD)- रिकरिंग डिपॉजिट के लिए नियम FD जैसे ही हैं।

