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लोकतंत्र को बंधक नहीं बनने देंगे... श्रृंगेरी विधायक केस में सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी उम्मीदवार की फजीहत

लोकतंत्र को बंधक नहीं बनने देंगे... श्रृंगेरी विधायक केस में सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी उम्मीदवार की फजीहत

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक के श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक टीडी राजेगौड़ा को बड़ी अंतरिम राहत दी। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने आदेश दिया कि राजेगौड़ा फिलहाल विधायक बने रहेंगे।

पीठ ने बीजेपी उम्मीदवार डीएन जीवराज पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि 'हम लोकतंत्र को इस तरह बंधक बनाने नहीं दे सकते।' यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव की उस पुनर्गणना से जुड़ा है जिसमें राजेगौड़ा को 3 मई 2026 को श्रृंगेरी सीट से बेदखल कर दिया गया था।

क्या है पूरा विवाद?

2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा महज 201 वोटों के अंतर से श्रृंगेरी सीट जीते थे। इस नतीजे को बीजेपी उम्मीदवार डीएन जीवराज ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के जरिये चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को पोस्टल बैलेट की पुनर्गणना का आदेश दिया, जिसमें 279 अस्वीकृत पोस्टल मतपत्रों की पुनः जांच शामिल थी। 3 मई, 2026 को रिटर्निंग ऑफिसर ने संशोधित परिणाम जारी किया जिसमें राजेगौड़ा के वोट 255 घटा दिए गए और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

इस फैसले के खिलाफ राजेगौड़ा ने अधिवक्ता तुषार गिरि के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। राजेगौड़ा का तर्क था कि हाईकोर्ट ने केवल 279 अस्वीकृत पोस्टल मतपत्रों की जांच का आदेश दिया था, जबकि रिटर्निंग ऑफिसर ने गैरकानूनी तरीके से उनके पक्ष के 562 वैध पोस्टल मतपत्रों पर भी पुनर्विचार कर लिया।

उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को भी इस आधार पर चुनौती दी कि उसी अदालत ने जीवराज के भ्रष्टाचार के आरोपों पर राजेगौड़ा के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला था, इसलिए पुनर्गणना की आवश्यकता ही नहीं थी। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यथास्थिति बहाल करने का अंतरिम आदेश पारित किया।

जीवराज पर आपराधिक मामला भी जारी

इस पूरे विवाद में एक और पहलू भी है। कांग्रेस के चुनाव एजेंट सुधीर कुमार मुरोल्ली ने जीवराज, उपायुक्त केएन रमेश, पूर्व रिटर्निंग ऑफिसर वेदमूर्ति और अन्य के खिलाफ पोस्टल बैलेट से छेड़छाड़ की आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है।

जीवराज ने इस मामले को रद्द कराने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और हाईकोर्ट ने जीवराज और वेदमूर्ति के खिलाफ मामले पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट पुनर्गणना की वैधता और हाईकोर्ट के आदेश की समीक्षा करेगा।

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