Stock Market Crash 30 April 2026: ग्लोबल लेवल पर निगेटिव संकेत मिलने के बाद गुरुवार, 30 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार खुलते ही क्रैश हो गया। आज सुबह 9:28 बजे बेंचमार्क इंडेक्स 903.10 अंक या 1.17% टूटकर 76,593.26 के लेवल पर कामकाज कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 288.85 अंक या 1.19% फिसलकर 23,888.80 के स्तर पर आ गया।
इस दौरान, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.2 % गिर गया ,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.65% की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों के 3 लाख करोड़ डूबे
दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली से सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कामकाज करते दिखे। सबसे अधिक गिरावट ऑटो, बैंकिंग और मेटल स्टॉक्स में गिरावट देखी जा रही है, जिसके वजह से इनके इंडेक्स 1% से लेकर 1.5% तक लुढ़क गए। बाजार में आई इस तेज बिकवाली में निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक डूब गए। दरअसल, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 468 लाख करोड़ से घटकर 465 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
शेयर बाजार में क्यों आई गिरावट? (Why is Market Falling Today?)
ईरान के बंदगाहों पर जारी रहेगी नाकेबंदी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने खलबली मचा दी है। उन्होंने साफ कहा है कि ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी महीनों तक चल सकती है। हालांकि ईरान ने शांति प्रस्ताव पेश किया है, लेकिन ट्रंप उससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नाकेबंदी बमबारी से ज्यादा प्रभावी है और जब तक ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद नहीं करता, यह चोकपॉइंट जारी रहेगा।
120 डॉलर पर पहुंची कच्चे तेल की कीमत
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। यह 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास हुए हमलों ने सप्लाई बाधित होने डर पैदा कर दिया है।
एग्जिट पोल्स ने बढ़ाया पॉलिटिकल पारा
भारत के पांच राज्यों के चुनावी एग्जिट पोल्स ने पॉलिटिकल पारा बढ़ा दिया है। जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में भाजपा अपनी पहली रेकॉर्ड जीत दर्ज कर सकती है। वहीं, केरल में पिछले 10 साल से काबिज LDF को हटाकर कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) की सत्ता में वापसी के संकेत हैं। तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में मौजूदा सरकारों के दोबारा लौटने की उम्मीद जताई गई है।
फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव
जेरोम पॉवेल की अध्यक्षता वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन भविष्य के लिए कड़ा रुख अपनाया है। 1992 के बाद यह पहला मौका है जब फेड कमेटी के सदस्यों के बीच फैसले को लेकर असहमति दिखी है। फेड का कहना है कि मिडिल ईस्ट के हालातों के कारण आर्थिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है और वे महंगाई व ग्रोथ रेट पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।

