Today Iftar timing 20 March 2026: रमजान का महीना खत्म होने वाला है। आज 20 मार्च को रमजान का 30वां और आखिरी रोजा रखा जा रहा है। चूंकि गुरुवार को ईद का चांद नजर नहीं आया, इसलिए अब यह तय हो गया है कि भारत में शुक्रवार को अलविदा जुम्मा मनाया जाएगा और शनिवार 21 मार्च को ईद का त्योहार मनाया जाएगा।
यही वजह है कि आज की शाम को सिर्फ एक आम इफ्तार की तरह नहीं, बल्कि रमजान की आखिरी इफ्तारी और चांद रात की रौनक के साथ देखा जा रहा है।
शहरों के हिसाब से आज इफ्तार का समय
आज 20 मार्च को अलग-अलग शहरों में इफ्तार का समय अलग रहेगा। स्थानीय मस्जिद, इलाके और सूर्यास्त के हिसाब से इसमें 1 से 2 मिनट का अंतर भी हो सकता है। इसी वजह से कई लोग एहतियात के तौर पर सूर्यास्त के कुछ मिनट बाद रोजा खोलते हैं।
आज आखिरी रोजे की इफ्तारी क्यों है खास
आज 20 मार्च को रोजेदार रमजान का आखिरी रोजा रख रहे हैं। ईद का चांद गुरुवार को नजर नहीं आया, इसलिए रोजों की संख्या 30 पूरी हो रही है। इसके साथ ही यह भी तय हो गया कि शनिवार 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी। आज का दिन अलविदा जुम्मा का भी है, इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। रमजान का आखिरी शुक्रवार और आखिरी रोजा एक साथ पड़ने से मस्जिदों, बाजारों और घरों में अलग ही माहौल दिखाई दे रहा है।
आज होगी चांद रात की रौनक
आज अलविदा जुम्मा के दिन ही चांद रात का माहौल भी बन गया है। गुरुवार रात से ही बाजारों में ईद की रौनक साफ दिखाई देने लगी थी। कपड़ों, टोपी, इत्र, सेवइयों और दूसरे सामान की खरीदारी के लिए बाजारों में दिन के साथ-साथ रात तक भीड़ रही। कई जगहों पर देर रात तक चहल-पहल देखने को मिली। रमजान के आखिरी रोजे के साथ ईद की तैयारियां अब आखिरी चरण में पहुंच चुकी हैं।
इफ्तारी से पहले जरूर पढ़ें रोजा खोलने की ये दुआ (Roza Kholne Ki Dua in Hindi)
'अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कल्तु, व अला रिज़्किका अफ़्तरतु।'
मतलब- ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरी दी हुई रोजी से रोजा खोला।
अंग्रेजी में रोजा खोलने की दुआ (Roza Kholne Ki Dua in English)-
'Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa 'alayka tawakkaltu wa 'ala rizqika aftartu.'
Meaning- O Allah! I fasted for You, I believe in You, I trust in You and with Your sustenance I break my fast.
रमजान का आखिरी रोजा सिर्फ भूख-प्यास के सब्र का नाम नहीं होता, बल्कि यह पूरे महीने की इबादत, दुआ, तौबा और अनुशासन का एक भावनात्मक मुकाम भी होता है। आज का इफ्तार एक तरह से उस पूरे सफर का आखिरी पड़ाव है, जिसे रोजेदारों ने पूरे यकीन और सब्र के साथ निभाया। शाम ढलते ही एक तरफ रोजा खुलेगा, दूसरी तरफ ईद की खुशियों का एहसास और गहरा हो जाएगा।

