पटना: बिहार की राजनीति में चर्चित नाम और साहेबगंज से पांच बार विधायक रहे डॉ. राजू कुमार सिंह को हर्ष फायरिंग मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू एमपी-एमएलए कोर्ट ने शनिवार को उन्हें चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
शुरुआती दौर में उनका संघर्ष राजद नेताओं से रहा। वर्ष 1990 के दशक में कथित अत्याचारों के विरोध में खुलकर आवाज उठाने के कारण उन्हें जनता का व्यापक समर्थन मिला और उनकी पहचान एक दबंग नेता के रूप में बनी। राजू सिंह का राजनीतिक सफर फरवरी 2005 में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) से विधायक बनने के साथ शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने लगातार कई चुनावों में जीत दर्ज की।
वर्ष 2015 में जदयू के एनडीए से अलग होने के बाद हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद उन्होंने लगातार दो बार फिर जीत हासिल कर साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। अब तक वह पांच बार विधायक रह चुके हैं। अपने राजनीतिक जीवन के दौरान राजू सिंह कई विवादों में भी घिरे रहे। पिछले वर्ष मंत्री बनने के बाद राजद नेता तुलसी राय ने उन पर मारपीट का आरोप लगाया था।
वहीं, एक अंचलाधिकारी (सीओ) ने भी उनके खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी। दिल्ली की राउज एवेन्यू एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा हर्ष फायरिंग मामले में चार साल की सजा सुनाए जाने के बाद अब उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त होना लगभग तय है। जनप्रतिनिधित्व कानून के अनुसार किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर्ष फायरिंग के मामले में किसी विधायक या सांसद की सदस्यता समाप्त होने का यह देश का पहला मामला माना जा रहा है। इस फैसले के बाद साहेबगंज विधानसभा सीट पर उपचुनाव की संभावना भी बढ़ गई है। राजनीति और बिहार की हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
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