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    अनमोल रिश्ता स्वर्णिम साझेदारी का

    सुबह की सुनहरी धूप छन छन कर रोशनदान से मुझ पर पड़ रही थी ,और मैं फुर्ती से घर के काम निबटाने में लगी हुई थी, जितनी तेजी से मेरे हाथ चल रहे थे...

    • 2 weeks ago
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    हो जाती हैं गलतियां, वो क्या किचन में तराजू लिए बैठी है।

    "प्रिया, कल मेरी मौसी आ रही हैं."गौरव ने प्रिया से कहा .. "अच्छा , कौन सी वाली?"-प्रिया ने पूछा."बड़ी वाली, जो वकील...

    • 2 weeks ago
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    अहोई अष्टमी आई साथ में फिर वही सवाल लायी...

    अहोई अष्टमी फिर से अपने साथ ढेरों सवाल लेकर आती है , यदि बेटे की माँ नहीं तो व्रत कैसे रखूँ इसके कुछ जवाब तो अहोई माता खुद ही दे देती...

    • 2 weeks ago
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    पति की व्यथा कौन समझे

    कल संडे था सो शॉपिंग के लिए मॉल गयी थी। बिलिंग में लंबी लाइन थी। मैं ट्रॉली लिए लाइन में खड़ी थी। मेरे आगे एक फैमिली अपना बिलिंग करवा रहा था। बच्चे...

    • 3 weeks ago
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    मेरा बेटा बदल गया

    लता जी ने चाय का प्याला किनारे रख कर सोचा आज तो फैसला करना ही होगा। उन्होंने दो मिनट अपने लिए रखे इसके पहले की सुबह की उथल पुथल पूरा दिन ले जाए।वेदांत और...

    • 3 weeks ago
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    मिस्टर एंड मिस फ्रैंक

    पता नहीं किसने रखा था उसका नाम 'वेदना' ! तीन वर्ष की भी नही हुई कि उसकी माँ नवजात शिशु को छोड़ परलोक सिधार गई। दादी के लाख समझाने के बाद भी वेदना के...

    • 3 weeks ago
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    बदलाव....

    मीनल अरी ओ मीनल जरा इधर तो आना, ये ले, तेरे लिए ये कपड़े लायी हूँ, दो चार सूट हैं जो पसंद आए ले लेना, बाकि अपनी कामवाली की बेटी को दे देना. संकोच क्या कर रही है ले ले तेरी...

    • 3 weeks ago
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    स्वार्थ भरी ममता

    इरा अपने माँ बाप की इकलौती संतान थी। बचपन से उसकी हर जायज नाजायज माँग पूरी होती आई थी जिस वजह से वो बहुत जिद्दी हो गई थी। उसे अपने सामने किसी का कोई ख्याल...

    • 3 weeks ago
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    माँ मुझे नहीं बनना था तुम्हारी परछाई

    माँ मुझे नहीं बनना था तुम्हारी परछाई,नहीं बनना था तुम्हारे जैसा,जब भी देखा करती थी तुम्हेंसूरज उगने से पहले जब जाग जाती थी तुमहमारे...

    • 3 weeks ago
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    नि:शब्द

    उमा चुपचाप रसोईघर में खड़ी-खड़ी रोटियां सेंक रही थी. उसकी आंखों से अविरल आँसू बह रहे थे जिन्हें वो अपनी साड़ी के पल्लू से पोंछती जा रही थी. एक तरफ यथावत उसके हाथ...

    • 3 weeks ago

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