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अब परशुरामपुरी के नाम से पहचाना जाएगा यूपी का जलालाबाद कस्बा, कैबिनेट बैठक में योगी सरकार का निर्णय

अब परशुरामपुरी के नाम से पहचाना जाएगा यूपी का जलालाबाद कस्बा, कैबिनेट बैठक में योगी सरकार का निर्णय

MP Breaking News 1 week ago

त्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। दरअसल, शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी रख दिया गया है।

लंबे समय से इस कस्बे का नाम बदलने पर विचार किया जा रहा था। अब कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया है। बता दें कि नाम परिवर्तन की ये प्रक्रिया मार्च 2018 से शुरू हुई थी। यह जगह भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है और यहां उनका एक प्राचीन मंदिर भी है इसलिए उन्हीं के नाम पर जलालाबाद कस्बे का नाम रखा गया है।

जलालाबाद बना परशुरामपुरी

शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद ने मार्च 2018 इस प्रक्रिया को शुरू किया था। सितंबर 2023 में बोर्ड बैठक में प्रस्ताव को पारित किया था। जहां शाहजहांपुर के तत्कालीन डीएम ने संस्तुति के साथ इसे प्रदेश सरकार को भेजा था। प्रदेश सरकार की ओर से इसे केंद्र सरकार के पास भेजा गया। केंद्र सरकार ने 20 अगस्त 2025 को राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। जिसे आज कैबिनेट की बैठक में हरी झंडी दिखाई गई।

भगवान राम की जन्मभूमि

कई पौराणिक ग्रंथों में उत्तर प्रदेश के इस छोटे से कस्बे को भगवान परशुराम की जन्मभूमि के रूप में वर्णित किया गया है। यही कारण रहा कि 2022 में सरकार ने इसे परशुराम जन्म भूमि के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की घोषणा की थी। यहां भगवान परशुराम का एक मंदिर मौजूद है, जिसका इतिहास हजारों साल पुराना बताया जाता है।

ये था मशहूर मुगल सैनिक केंद्र

जिस तरह से जलालाबाद के भगवान परशुराम से जुड़े होने की बात कही जाती है। उस तरह से इसका नाम रखने के पीछे कई लोग यह बताते हैं कि मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर के सम्मान में इस कस्बे का नाम जलालाबाद रखा गया था। मुगल शासन काल के दौरान यह कस्बा दिल्ली से लेकर बंगाल और अवध को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों के पास हुआ करता था। मुगल सेना आने जाने और ठहरने के दौरान इसे प्रमुख पड़ाव के रूप में इस्तेमाल करती थी। अकबर के शासनकाल में इस इलाके की कमान मुगल अफसर के हाथों में थी। तब इसे एक मुगल सैनिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में पहचाना जाता था।

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