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अल्मोड़ा के डोल आश्रम में आध्यात्मिक महोत्सव, मुख्यमंत्री धामी ने किया मां राजेश्वरी का अभिषेक और 1100 कन्याओं का पूजन

अल्मोड़ा के डोल आश्रम में आध्यात्मिक महोत्सव, मुख्यमंत्री धामी ने किया मां राजेश्वरी का अभिषेक और 1100 कन्याओं का पूजन

MP Breaking News 2 weeks ago

त्तराखंड की पावन धरा, विशेषकर अल्मोड़ा जनपद का डोल स्थित आश्रम, इन दिनों एक विशिष्ट आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है। इसी क्रम में, श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम न्यास द्वारा आयोजित श्री पीठम स्थापना महोत्सव में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

यह अवसर न केवल धार्मिक अनुष्ठानों की भव्यता का साक्षी बना, बल्कि मुख्यमंत्री के आध्यात्मिक जुड़ाव और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके सम्मान को भी दर्शाता रहा।

इस पावन अवसर पर, मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करते हुए 1100 कन्याओं का पूजन कर उनके भीतर निहित देवी शक्ति को नमन किया। यह दृश्य भारतीय संस्कृति के 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता' के शाश्वत सिद्धांत को चरितार्थ करता प्रतीत हुआ, जहां कन्याओं को साक्षात देवी स्वरूप मानकर उनकी अर्चना की गई। इसके उपरांत, उन्होंने विधि-विधान से माँ राजेश्वरी का अभिषेक एवं पूजा-अर्चना की, जहां उन्होंने पूरे प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण के लिए हार्दिक कामना की। यह अनुष्ठान न केवल गहन आस्था का प्रतीक था, बल्कि जनकल्याण के प्रति मुख्यमंत्री की अटूट प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता था।

डोल आश्रम बना आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र

डोल आश्रम में अपने आगमन पर, मुख्यमंत्री धामी ने सर्वप्रथम आश्रम परिसर में स्थापित उस विराट श्रीयंत्र का अवलोकन किया, जिसे विश्व के सबसे बड़े श्रीयंत्र के रूप में जाना जाता है। इस दिव्य श्रीयंत्र के दर्शन मात्र से ही उन्हें एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हुई, जिसका उन्होंने स्वयं उल्लेख किया। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि यह स्थान आज जिस विशिष्ट पहचान और वैश्विक ख्याति को प्राप्त कर चुका है, वह निःसंदेह बाबा कल्याणदास की अथक साधना, गहन तपस्या और दूरदर्शी संकल्प का ही सुफल है। बाबा कल्याणदास के आध्यात्मिक प्रयासों ने इस आश्रम को न केवल एक पवित्र तीर्थ स्थल बनाया है, बल्कि यह अब आध्यात्मिक चेतना के वैश्विक प्रसार का एक जीवंत और प्रमुख केंद्र भी बन चुका है, जहां से ज्ञान और शांति का प्रकाश चारों दिशाओं में फैल रहा है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बाबा कल्याणदास द्वारा वैश्विक पटल पर आध्यात्मिक चेतना के प्रसार हेतु किए जा रहे अथक प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय हैं। उनके इन प्रयासों से भारतीय संस्कृति और आध्यात्म का संदेश विश्व के कोने-कोने तक पहुंच रहा है, जिससे वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को बल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह आश्रम आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, गहन आध्यात्मिक साधना और समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का एक संगम स्थल बन गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर न केवल शांति और संतोष का अनुभव करते हैं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभूति भी प्राप्त करते हैं, जो उन्हें जीवन के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है और मानसिक शांति प्रदान करती है।

उत्तराखंड को आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्य सरकार की आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवभूमि उत्तराखंड को आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। चारधाम यात्रा में प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य में तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं एवं सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यह श्रद्धालुओं के विश्वास और सरकार के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि अब अधिक से अधिक लोग इस पुण्य भूमि की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे न केवल धार्मिक आस्था को बल मिल रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल रही है और रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।

इस गरिमामयी आयोजन में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उनके साथ, स्थानीय विधायक मोहन सिंह मेहरा, विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल जैसे महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों में जिलाधिकारी अंशुल सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के, मुख्य विकास अधिकारी रामजीशरण शर्मा सहित कई अन्य अधिकारीगण ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन सभी के साथ, बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु एवं दूर-दराज से आए भक्तगण भी इस आध्यात्मिक महोत्सव का साक्षी बनने के लिए उपस्थित थे, जिन्होंने इस आयोजन को और भी भव्य एवं सफल बनाया।

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