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इंदौर के MGM में जन्म के 24 घंटे के भीतर होगी सिकल सेल न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग, केंद्र से मिलेगी तकनीकी और वित्तीय मदद

इंदौर के MGM में जन्म के 24 घंटे के भीतर होगी सिकल सेल न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग, केंद्र से मिलेगी तकनीकी और वित्तीय मदद

MP Breaking News 2 weeks ago

इंदौर के एमवाय अस्पताल में सिकल सेल बीमारी की जांच और इलाज को नई दिशा मिलने वाली है। दरअसल यहां जल्द ही जन्म के पहले 24 घंटे के भीतर नवजात बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू करने की तैयारी है।

इससे बीमारी के लक्षण आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और जोखिम वाले बच्चों की समय रहते पहचान कर इलाज शुरू किया जा सकेगा।

दरअसल हाल ही में जनजातीय कार्य मंत्रालय की केंद्रीय सचिव रंजना चोपड़ा ने सेंटर का निरीक्षण किया और यहां उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सिकल सेल प्रभावित आबादी के लिए सेंटर के काम को सराहते हुए इसे राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करने में अहम बताया। इसके बाद केंद्र सरकार ने यहां नई तकनीक, जरूरी उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने में सहयोग का भरोसा दिया है।

जन्म के पहले दिन ही होगी सिकल सेल की पहचान

एमवाय अस्पताल में प्रस्तावित Newborn Screening सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नवजात बच्चों में सिकल सेल बीमारी का खतरा जन्म के शुरुआती 24 घंटे के भीतर ही पता लगाया जा सकेगा। अभी कई मामलों में बीमारी की पहचान तब होती है, जब बच्चे में लक्षण दिखाई देने लगते हैं या उसकी हालत गंभीर हो जाती है। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद शुरुआती जांच से ऐसे बच्चों की समय रहते निगरानी और इलाज संभव होगा। इसका सबसे अधिक फायदा मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों को मिलेगा, जहां सिकल सेल के मरीजों की संख्या ज्यादा है। फिलहाल एमवाय अस्पताल में करीब 1,400 सिकल सेल मरीज रजिस्टर्ड हैं और उन्हें नियमित इलाज, रक्त संबंधी सेवाएं और विशेषज्ञ सलाह दी जा रही है। केंद्र सरकार के सहयोग से स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ने पर ज्यादा बच्चों तक यह सुविधा पहुंचाई जा सकेगी। इससे परिवारों को भी बीमारी की जानकारी समय पर मिलेगी और आगे की चिकित्सा योजना बनाना आसान होगा।

आधुनिक इलाज से मजबूत होगा सेंटर

दरअसल एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने बताया कि सेंटर में HLA Typing सुविधा शुरू करने की भी तैयारी चल रही है। इसके लिए संशोधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है जिसमें आधुनिक उपकरण, रिएजेंट्स और अन्य संसाधनों की मांग शामिल है। HLA Typing शरीर की कोशिकाओं पर मौजूद ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन की पहचान करने की प्रक्रिया है, जो बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रक्रियाओं में उपयोगी होती है। हालांकि सेंटर में पहले से Red Cell Exchange, Bone Marrow Transplant और Chorionic Villus Sampling (CVS) जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। रेड सेल एक्सचेंज जैसी सुविधा देश के चुनिंदा संस्थानों में ही मौजूद है और गंभीर मरीजों को दूसरे राज्यों से भी यहां रेफर किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक मरीज के लिए 15 से 18 यूनिट तक रक्त की जरूरत पड़ सकती है, जिससे शरीर में सिकल सेल की मात्रा काफी कम करने में मदद मिलती है।

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