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कब है निर्जला एकादशी व्रत, जाने इससे जुड़ी पौराणिक कथा, मुहूर्त और जरूरी नियम

कब है निर्जला एकादशी व्रत, जाने इससे जुड़ी पौराणिक कथा, मुहूर्त और जरूरी नियम

MP Breaking News 1 week ago

कादशी के व्रत का सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व माना गया है। इनमें ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी बहुत अधिक महत्वपूर्ण मानी गई है। इस व्रत के नाम से ही जाहिर है कि यह निर्जला यानी बिना जल के किया जाता है।

यही वजह है कि इसे सबसे कठिन एकादशी में से एक माना गया है।

निर्जला एकादशी का व्रत इस बार 25 जून 2026 दिन गुरुवार को रखा जाएगा। ऐसा कहते हैं कि स्क्रीन किया गया तप और निष्ठा जीवन में शुभ परिणाम लेकर आता है। जो व्यक्ति साल भर की 24 एकादशी नहीं रख पाता है। वो अगर निर्जला एकादशी का उपवास रख लेता है तो उसे सभी व्रत के बराबर पर फल मिलता है। चलिए इस बात से जुड़ी मानता और नियम के बारे में जान लेते हैं।

निर्जला एकादशी कैसे पड़ा नाम

निर्जला एकादशी के नामकरण के पीछे महाभारत की एक रोचक कथा है। धार्मिक मान्यताओं की मुताबिक पांडवों में भीमसेन को छोड़कर अर्जुन, युधिष्ठिर, नकुल, सहदेव, माता कुंती और द्रौपदी सभी एकादशी का व्रत रखते थे। भीम को भूख अधिक लगती थी जिस वजह से उनके लिए भूखा रहना मुश्किल था। वो अक्सर इस बात से परेशान रहते थे की व्रत ना रखने की वजह से उन्हें पाप लगेगा। एक दिन वह महर्षि वेदव्यास के पास पहुंचे। तब महर्षि ने उन्हें कहा कि अगर वह ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी बिना जल लिए व्रत रख लेंगे तो उन्हें सभी एकादशी का फल मिलेगा। बड़ी कठिन परिस्थिति में भीम ने इस व्रत को पूरा किया। बिना जल के रखे जाने के कारण इसे निर्जला एकादशी नाम दिया गया। भीम ने इसे शुरू किया था जिस कारण उसे भी से भी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी पहचाना जाता है।

क्या है शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून की शाम 6:12 से हो जाएगी और यह 25 जून की रात 8:09 तक रहेगी। उदया तिथि के मुताबिक एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। अगले दिन 26 जून को इसका पारण किया जाएगा। पारण का शुभ समय 5:15 से 8:13 तक है।

दान का है महत्व

युवराज भीषण गर्मी के दौरान आता है। ऐसे में दान का काफी महत्व माना गया है। व्रत के अगले दिन सुबह जरूरतमंदों को जल से भरा घड़ा, पंखा, खरबूजा, छाता, वस्त्र और सत्तू का दान करें। जो व्यक्ति निर्जला उपवास रखने के साथ दान करता है उसे शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

क्या है नियम

  • निर्जला एकादशी पर सबसे मुख्य नियम यही है कि द्वादशी तिथि की रात से लेकर एकादशी का पूरा दिन और द्वादशी पर व्रत के पारण तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है।
  • व्रत करने वाला व्यक्ति कुल्ला कर सकता है लेकिन पानी पेट में नहीं जाना चाहिए।
  • व्रत के एक दिन पहले शाकाहारी और सात्विक भोजन करें। तामसिक आहार से दूर रहना जरूरी है।
  • इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और अपने मन में किसी के प्रति बुरे विचार ना आने दें।
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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: MP Breaking News